मुंबई :  भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी छमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 2.7 से 3.2 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने सामान्य मानसून और खाद्य वस्तुओं के दाम में नरमी को देखते हुये मुद्रास्फीति अनुमान को कम किया है। रिजर्व बैंक ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की अपनी पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में कहा है कि व्यापक रूप से खाद्य वस्तुओं के दाम घटने से आगे चलकर प्रमुख मुद्रास्फीति नीचे आएगी।

इस बीच, केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दर रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर पूर्ववत रखा है। इससे पिछली अक्टूबर की द्विमासिक समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-मार्च अवधि यानी दूसरी छमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के 3.9 से 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। हालांकि, खाद्य वस्तुओं के दाम घटे हैं लेकिन गैर -खाद्य समूह में मुद्रास्फीति व्यापक रूप से बढ़ी है। पिछली मौद्रिक समीक्षा के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है।

नवंबर अंत तक कच्चे तेल का भारत का खरीद मूल्य घटकर 60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो अक्टूबर की शुरुआत में 85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। रिजर्व बैंक ने कहा कि इन सब कारकों पर ध्यान देते हुए और मानसून सामान्य रहने की वजह से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 2.7 से 3.2 प्रतिशत कर दिया गया है। अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में मुद्रास्फीति के 3.8 से 4.2 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है।