नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह ने गुरूवार को कहा कि देश के इस्पात उद्योग के वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिये एकीकृत इस्पात कंपनियों के साथ साथ पुराना इस्पात गला कर नया माल तैयार करने वाले ‘सेकेंडरी’ स्टील क्षेत्र को अहम भूमिका निभानी है। उन्होंने कहा कि नई इस्पात नीति में 2030-31 तक क्षमता बढ़ाकर 30 करोड़ टन हासिल करने का लक्ष्य है। इस्पात मंत्री ने ‘सेंकेंडरी स्टील’ क्षेत्र में 26 मिनी रत्न इस्पात कंपनियों को पहली बार पुरस्कृत करते हुए यह बात कही।

फिलहाल भारत की इस्पात क्षेत्र में क्षमता 13.4 करोड़ टन है जबकि खपत 70 किलो प्रति व्यक्ति है। देश में निर्माण क्षेत्र से लेकर मशीन उपकरण, पाइप, स्टेनलेस स्टील जैसे उत्पादों के साथ निर्यात के लिहाज से सेंकेंडरी स्टील’ (पुराने इस्पात के पुनर्चक्रण से तैयार उत्पाद) काफी महत्वपूर्ण है। यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार सिंह ने कहा कि भारत का वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी इस्पात उद्योग बनाने का लक्ष्य है, ऐसे में एकीकृत इस्पात कंपनियों के साथ ‘सेकेंडरी’ स्टील क्षेत्र को अहम भूमिका निभानी है।

2030-31 तक क्षमता बढ़ाकर 30 करोड़ टन हासिल करने के लक्ष्य के लिये यह जरूरी है। वैश्विक रूप से उनकी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिये पुरस्कार का गठन किया गया है। इस मौके पर इस्पात सचिव विनय कुमार ने कहा कि इस पुरस्कार से ‘सेकेंडरी’ इस्पात क्षेत्र को प्रदर्शन में सुधार लाने के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिये प्रोत्साहन मिलेगा।