इस साल भारतीय मौसम विभाग के जानकारी के अनुसार भारत में मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है। सोमवार को मौसम विभाग ने कहा कि जून से सितंबर की अवधि में मॉनसून के सामान्य रहने की संभावना है। मौसम विभाग के एक अधिकारी के अनुसार इस साल देश में बेहतर फसल की उम्मीद की जा सकती है। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में जहां आधे से ज्यादा खेती योग्य जमीनों पर सिचांई की समस्या रहती है इस बार यहां मानसून का साथ मिलेगा।

भारतीय मौसम विभाग के डायरेक्टर जर्नल के.जे. रमेश ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में मानसून का 2 ट्रिलियन का योगदान है। मानसून का लंबी अवधि (एलपीए) का औसत 97 प्रतिशत रहेगा, जो कि इस मौसम के लिए सामान्य है। कम मॉनसून की ‘बहुत कम संभावना’ है। इससे पहले प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट ने भी 4 अप्रैल को बयान जारी किया था कि 2018 में मॉनसून 100 फीसदी सामान्य रहने की संभावना है।

उन्होंने आगे कहा कि मानसून मई के मध्य में सबसे पहले केरल पहुंचेगा और 45 दिनों के अंदर पूरे देश में फैल जायेगा। इससे पहले 2017 और 2016 में भी मॉनसून सामान्य रहा था, लेकिन 2014 और 2015 में मॉनसून कम होने की वजह से देश को सूखे की मार झेलनी पड़ी थी। सामान्य बारिश होने से अच्छी खेती होगी और अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा और सकारात्मक असर होता है। एलपीए के 96 फीसदी से 104 फीसदी तक रहने की उम्मीद है। पिछले 50 सालों में मानसून का औसत 89 सेमी है। इस बार भी जून से शुरू होने वाले चार महीने के पूरे सीजन में इसी औसत से मानसून के कारण बारिश होगी।

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