सीबीआई ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि एयरसेल-मैक्सिस मामले में केंद्र ने उसे सेवारत और पूर्व नौकरशाहों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम और उनका बेटा कार्ति भी आरोपी हैं।

विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के जिन तत्कालीन सदस्यों के खिलाफ म‍ंजूरी हासिल की गई है उनमें तत्कालीन आर्थिक मामलों के सचिव अशोक झा, वित्त मंत्रालय में तत्कालीन अतिरिक्त सचिव अशोक चावला और तत्कालीन संयुक्त सचिव कुमार संजय कृष्ण शामिल हैं। इसके अलावा मंत्रालय में तत्कालीन निदेशक दीपक कुमार सिंह और तत्कालीन अवर सचिव राम शरण शामिल हैं।

इन पांच में से तीन विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत हैं जबकि दो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यह प्रतिवेदन विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी के समक्ष किया गया जिन्होंने सीबीआई और ईडी द्वारा इस संबंध में चिदंबरम और कार्ति के खिलाफ दायर मामलों में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक की अवधि एक फरवरी तक बढ़ा दी।

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एजेंसी ने पिछले साल 16 नवंबर को कहा था कि पी चिदंबरम के लिए ऐसी ही मंजूरी हासिल की जा चुकी है। मामले में 18 आरोपी हैं।
सीबीआई की तरफ से पेश सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने विशेष सीबीआई अदालत को बताया कि मामले में जारी जांच पूरी होने वाली है। इसके बाद विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख एक फरवरी तय की।

पी चिदंबरम और कार्ति की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और ए एम सिंघवी ने गिरफ्तारी से छूट की अवधि बढ़ाने की मांग की थी। अदालत ने सीबीआई के मामले के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धनशोधन मामले में सुनवाई अगली तारीख तक के लिये स्थगित कर दी। ईडी के विशेष लोक अभियोजक नितेश राणा ने इस संदर्भ में अनुरोध किया था।

अदालत ने पूर्व में सीबीआई से सवाल किया था कि उचित अनुमति लिये बिना उसने आरोप-पत्र क्यों दायर किया। अदालत ने पूछा, “इतनी जल्दबाजी किस बात की थी?”

इस मामले में सीबीआई द्वारा 19 जुलाई को दायर आरोप-पत्र में चिदंबरम और उनके बेटे का नाम था। एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश के समक्ष एक पूरक आरोप-पत्र दायर किया था, जिन्होंने इस पर विचार के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की थी।