अरुणाचल और अंडमान-निकोबार में राजमार्गों पर बिकेगी शराब


नई दिल्ली, (भाषा): अरुणाचल प्रदेश और अंडमान-निकोबार द्वीप को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें हटाने संबंधी अपनी व्यवस्था से उन्हें छूट प्रदान कर दी। प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूॢत धनन्जय वाई. चन्द्रचूड और न्यायमूॢत एल. नागेश्वर राव की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने यह छूट देते हुए इस तथ्य को ध्यान में रखा कि अरुणाचल प्रदेश के लिये करीब 50 प्रतिशत राजस्व शराब की बिक्री से ही मिलता है और 500 मीटर के दायरे की पाबंदी से राज्य में शराब की कुल 1011 दुकानों में से 916 दुकानें प्रभावित हुई हैं।

पीठ ने कहा, ‘अरुणाचल प्रदेश के वकील का कहना है कि राज्य का भू-भाग सिक्किम और मेघालय की तरह ही है और इसलिए अरुणाचल प्रदेश भी सिक्किम और मेघालय के बारे में 31 मार्च को पारित आदेश के अनुरूप समानता का हकदार है। यह अनुरोध स्वीकार किया जाता है।’ इसी तरह, पीठ ने अंडमान-निकोबार द्वीपों का भी अनुरोध स्वीकार करते हुए उसे भी 31 मार्च के आदेश के अनुरूप 500 मीटर के दायरे की पाबंदी से ढील दे दी।

शीर्ष अदालत ने 31 मार्च को कहा था कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब की दुकानों को एक अप्रैल से बंद करना होगा परंतु उसने पर्वतीय राज्यों सिक्किम, मेघालय और हिमाचल प्रदेश और 20000 तक की आबादी वाले इलाकों को इससे छूट दे दी थी। न्यायालय ने उत्तराखंड की इसी तरह की ढील के लिये अनुरोध पर भी विचार किया परंतु राज्य सरकार के वकील राजस्व के नुकसान के बारे में कोई आंकड़े पेश नहीं कर सके।

न्यायालय ने उन्हें इसका विवरण पेश करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा, ‘आप हमें आंकड़े दीजिये। हम आपको समय देंगे। हम इस चरण में सहमत नहीं हैं। आप हमें पहले आंकड़े उपलब्ध कराइये।’ इसके साथ ही न्यायालय ने इस मामले को अगले सप्ताह के लिये सूचीबद्ध कर दिया। केरल की भी इसी तरह की अर्जी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिये आयी परंतु राज्य सरकार के वकील ने कहा कि वह अपनी अर्जी में संशोधन करेंगे।