‘बम बम भोले’ के नारों की गूंज से अमरनाथ यात्रा शुरू, पहला जत्था रवाना


श्रीनगर : हर हर महादेव तथा बम बम भोले के नारों के साथ तीर्थयात्रियों का पहला जत्था आज कड़ी सुरक्षा के बीच यहां आधार शिविर से पवित्र अमरनाथ गुफा के लिये रवाना हो गया। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी इस यात्रा के दोनों मार्गों पर तीर्थयात्रियों को निशाना बना सकते है जिसे देखते हुए सुरक्षा में किसी प्रकार की कोई ढील नहीं दी गई है।

बालटाल से आज सुबह अमरनाथ गुफा के लिये पहला जत्था रवाना

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उन्होंने कहा कि बालटाल तथा नूनवान पहलगाम शिविर में पिछले कुछ दिनों से सैकड़ों तीर्थयात्री थे जिनमें कल जम्मू से आये 2,200 से अधिक तीर्थयात्रियों का जत्था भी शामिल हो गया। उन्होंने बताया कि बालटाल शिविर से आज सुबह अमरनाथ गुफा के लिये रवाना हुये तीर्थयात्रियों के जत्थे में महिलाएं तथा साधु भी शामिल थे। तीर्थयात्रियों को दोपहर तक पवित्र गुफा में जाकर स्वनिर्मित बर्फ के शिवङ्क्षलग का दर्शन करने हैं। अधिकतर यात्री इसी मार्ग से आधार शिविर लौटेंगे। तीर्थयात्रियों के एक अन्य जत्थे ने चंदनवारी प्रस्थान करने के लिए नूनवान पहलगाम शिविर छोड़ दिया है जो वाहनों के जरिये पहुंचने का आखिरी शिविर है।

चंदनवारी में होगा रात्रि विश्राम

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अधिकारियों ने बताया कि अधिकतर यात्री चंदनवारी में ही रात्रि विश्राम करेंगे और कल सुबह अगले पड़ाव के लिए रवाना हो जाएंगे1 इस यात्रा को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं।

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

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इस यात्रा के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और यात्रा मार्ग की निगरानी उपग्रहों तथा ड्रोन विमानों से की जाएगी। यात्रा मार्ग पर पुलिस और अद्र्धसैनिक बलों के तीस हजार जवानों को तैनात किया गया है। जम्मू से यात्रियों के वाहनों के आगे सुरक्षा बलों के बुलेट प्रूफ वाहन रहेंगे और विभिन्न चिन्हित स्थानों पर क्लोज सर्किट कैमरे भी लगाए गए हैं।

बीमा राशि एक लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपए की गई
इस बार यात्रियों पर आतंकवादी खतरे को देखते हुए उनकी जीवन बीमा राशि एक लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपए कर दी गयी है। यह सुविधा हालांकि अंपजीकृत यात्रियों को नहीं मिलेगी और उन्हें यात्रा पर जाने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।

बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को यात्रा की अनुमति नहीं 

श्री अमरनाथ यात्रा श्रद्धालु बोर्ड पहले ही घोषणा कर चुका है कि 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों और 75 वर्ष से अधिक के बुजुर्गाें तथा छह माह की गर्भवती महिलाओं को यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। महिला यात्रियों को साड़ी के बजाए सलवार कमीज, पैंट शर्ट और ट्रैक सूट तथा स्पोर्टस शूज पहनने को कहा गया है। यात्रा के दौरान शराब का सेवन और तली- भुनी चीजें नहीं खाने के निर्देश दिये गए हैं।

यात्रा मार्ग की त्रिस्तरीय सुरक्षा

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सूत्रों ने बताया कि इस बार यात्रा मार्ग की सुरक्षा त्रिस्तरीय की गई है ताकि आतंकवादियों और अराजक तत्वों के किसी भी नापाक मंसूबे को नाकाम किया जा सके। यात्रा मार्ग के पहाड़ी क्षेत्रों और मैदानी हिस्सों में सेना और अर्धसैनिक बलों के अलावा राज्य पुलिस को दोनों तरफ तैनात किया गया है। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने यात्रा अवधि के दौरान 200 अतिरिक्त सुरक्षा कंपनियों को तैनात किया है।

24 राहत टीमों को तैनात किया
श्री अमरनाथ श्रद्धालु बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी उमंग नरूला ने बताया कि इस यात्रा अवधि के लिए 24 राहत टीमों को तैनात किया गया है। इन टीमों में राज्य सशस्त्र पुलिस बल, राज्य आपदा राहत बल ,राष्ट्रीय संकट मोचन बल (एनडीआरएफ) के कर्मचारियों को शामिल किया गया है जिनके पास आवश्यक उपकरण है।

35 डाग स्कवाड्स की भी तैनाती

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उन्होंने बताया कि सेना ,राज्य पुलिस ,सीमा सुरक्षा बल और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ने 35 डाग स्कवाड्स को तैनात किया है जिनमें से 27 दस्ते पहलगाम और आठ दस्ते बालटाल मार्ग पर तैनात रहेंगे। राज्यपाल एनएन वोहरा ने पवित्र गुफा के शिविर निदेशकों को निर्देश दिए है कि यह पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए कि टैंट , दुकानें और लंगरों की व्यवस्था केवल चिन्हित स्थानों पर ही की जाए। इसके साथ ही सुरक्षा बलों को यह जांच करने के भी निर्देश दिए गए है कि पहाड़ी ढ़लानों पर कोई चट्टान ढीली अवस्था में तो नहीं है उन्होंने साफ-सफाई के उपयुक्त इंतजामों के अलावा यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सभी जैविक कचरे का निस्तारण सही तरीके से किया जाए और इसकेे लिए गहरे गड्ढे खोदे जाने चाहिए।

कुलियोंं, खच्चरों और पिट्ठूओं की दरों को प्रदर्शित करने के निर्देश

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श्री वोहरा ने कुलियोंं, खच्चरों और पिट्ठूओं की दरों को भी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं ताकि यात्रियों में किसी तरह का कोई भ्रम पैदा न हो। इसके अलावा सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच सुबह शाम नियमित आधार पर बैठक करने और सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।

राजधानी दिल्ली से आई चिकित्सकों की टीम स्थानीय लोगों और सेवा प्रदाताओं का उपचार कर रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए चिकित्साकर्मियों को आवास और अपने परिजनों से बातचीत करने की सुविधा प्रदान की गई है।