कराधान व्यवस्था में हुआ बड़ा सुधार


पटना : चार्टेड एकाउंटेंट दिवस पर इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टेड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया द्वारा जीएसटी पर आयोजित सम्मेलन में केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी का शुभारंभ हो चुका है। आपको बताते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि स्वतंत्रता के बाद कराधान व्यवस्था में माल और सेवा कर सबसे बड़ा सुधार है। उन्होंने कहा कि यह सहकारी संघवाद में एक महान प्रयोग है जहां केन्द्र और राज्यों ने अपनी संप्रभुता समायोजित की है।

सभी निर्णय एकमत होकर लिए गये हैं। देश भर में वस्तुओं के मुक्त प्रवाह के लिए टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाओं को दूर करके एक आम राष्ट्रीय बाजार का निर्माण किया गया है जहां कोई चेक व्यवस्था अथार्त कोई नाका नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कर-दाताओं और कर अधिकारियों के बीच इंटरफेस की संख्या को कम करके अनुपालन लागत को कम करना तथा सभी प्रक्रियाओं चाहे वे कारोबार की हो अथवा कर प्रशासन की हों, सभी में सूचना प्रोदयोगिक को गहन रूप से अपनाया जाएगा। जीएसटी अपनाने से केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट, खरीद कर, मनोरंजन कर, प्रवेश कर, चुंगी आदि जैसे कई कर खत्म हो जाएंगे और मात्र एकल कर रह जाएगा।

पहली बार एक राष्ट्रीय कर प्रशासन योजना लायी जा रही है जहां केन्द्र और राज्यों के अधिकारी एक समान राष्ट्रीय अप्रत्यक्ष कर कानून बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। भारत 1947 मे राजनैतिक संघ बन गया लेकिन जीएसटी अब भारत को एक आर्थिक संघ में भी रूपान्तरित कर देगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी के अंतर्गत कर निर्धारण वर्तमान संरचना जहां कुछ मामलों में जैसे सॉफ्टवेयर के मामलोंए वस्तुओं के उपयोग के अधिकार आदि के मामलों में केन्द्र और राज्यों में कर निर्धारण के निर्णय में अनिश्चितता मौजूद रहती है, इसके मुकाबले कर निर्धारण के क्षेत्राधिकार के संबंध में स्प्ष्टता पर मुकदमेबाजी कम होगी।

जीएसटी शासन में एक शुल्क कानून रखा गया है जहां विभिन्न शुल्क कानूनों में विदयमान बहु मूल्यांकनों की तुलना में एक सरल मूल्यांकन रखा गया है। प्रस्तावित जीएसटी की प्रक्रिया के अंतर्गत विशिष्ट शुल्क दर के साथ, सरल आदान शुल्क ऋण तंत्र और समेकित जीएसटी नेटवर्क सूचना उपलब्ध रहेगी और सरकार के लिए संसाधनों को प्रशासित करना और भी सरल हो जाएगा।