चीन की बढ़ती ताकत भारत के लिए चिंता का विषय


पटना : बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि हिन्द महासागर में चीन अपने न्यूक्लियर और पारंपरिक सबमरिन्स की तैनाती बड़ी तेजी से बढ़ा रहा है। जो चुपके से समुद्री बारूदी सुरंग बिछाकर भारतीय बंदरगाहों और समुद्री मार्गों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी ओर बंदरगाहों और समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना को जरुरत है 24 माईन स्वीपर जंगी बेड़े कीय जबकि हमारे पास है मात्र 4 ही जंगी बेड़ा और तो और इस जरुरत की पूर्ती की प्रक्रिया भी अभी शुरू नहीं हुई हैं।

ऐसा लगता है कि समुद्री सुरक्षा से बिल्कुल बेखबर है हमारी मोदी सरकार। श्री सिंह ने कहा कि स्वण् राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में समुद्री सुरक्षा की जरुरत को पूरा करने के लिए 1986-87 में भारत ने सोवियत संघ से 6 माईनस्वीपर जंगी बेड़े की खरीद की थी। जिसमें से हाल ही में दो जंगी बेड़े आईएनएस करवार और काकीनाडा की सेवा भारतीय नेवी से समाप्त हो गई। बंदरगाहों, समुद्री मार्गो, पूर्वी और पश्चिमी तटों की सुरक्षा के लिए अगर अभी से भी कम से कम आधे यानि 12 माईन स्वीपर के करार को अमलीजामा पहनाया जाता है तो पहला जंगी बेड़ा 2021 तक देश को प्राप्त होगा और शेष 11 की प्राप्ति 2026 तक हो पायेगी।

इसके अलावे भी नेवी को पर्याप्त सबमरिन्स और बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर की भी जरुरत है। जिसकी मांग हमारी नौसेना करती रही है। श्री सिंह ने कहा कि हमारी तीनों सेनाओं की किसी भी सुरक्षा जरूरतों से समझौता करने की अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां नही है। अत: केंद्र की मोदी सरकार से मैं अनुरोध करता हॅू कि समुद्री सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की जरूरतों को अविलम्ब पूरी करें।