भ्रष्टाचार से नहीं कर सकता समझौता


पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि महागठबंधन से अलग होने के अलावा उनके पास अन्य कोई विकल्प नहीं था क्योंकि गठबंधन में बने रहने का मतलब होता भ्रष्टाचार से समझौता करना। कुमार ने हाल में लालू प्रसाद की राजद का साथ छोड़कर चार वर्ष बाद दोबारा राजग का दामन थाम लिया और भाजपा एवं रामविलास पासवान की लोजपा के साथ गठबंधन में सरकार बनायी। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”भ्रष्टाचार के आरोप थे और (लालू प्रसाद और परिवार के खिलाफ) मामले दर्ज किये गए थे। मैंने उनसे केवल यह कहा था कि उचित जवाब के साथ सामने आयें। ऐसा करने की बजाय उन्होंने यह कहते हुए मेरा मजाक उड़ाया कि क्या मैं कोई सीबीआई या पुलिस का अधिकारी हूं।”

कुमार ने कहा, ”लालूजी ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। भ्रष्टाचार पर बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की बात करने के बाद मैं चुप कैसे रह सकता था? अब मुझे लगता है कि उनके पास कोई उचित जवाब नहीं था।” कुमार ने एक धर्मनिरपेक्ष गठबंधन तोडऩे को लेकर हो रही उनकी आलोचना के परिप्रेक्ष्य में अपना बचाव किया। उन्होंने सवाल किया, ”धर्मनिरपेक्षता का क्या मतलब है? क्या धर्मनिरपेक्षता का मतलब हजारों करोड़ों रुपये की सम्पथि बनाना है?”

इस बीच पटना उच्च न्यायालय ने नीतीश कुमार द्वारा नयी सरकार गठन को चुनौती देने वाली दो जनहित याचिकाओं को आज खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण के बाद अदालत के हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। एक जनहित याचिका जहां राजद विधायकों सरोज यादव और चंदन वर्मा की ओर से जबकि दूसरी समाजवादी पार्टी सदस्य जितेंद्र कुमार की ओर से दायर की गई थी।  नीतीश ने जहां भाजपा के साथ जाने के अपने निर्णय का बचाव किया वहीं जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने अपनी असहमति जतायी और कहा कि 2015 के विधानसभा चुनाव का जनादेश महागठबंधन के लिए था। उन्होंने घटनाक्रम को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया।

यादव ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, ”स्थिति हमारे लिए अरूचिकर है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गठबंधन टूट गया है। जनता का जनादेश इसके लिए नहीं था। बिहार के 11 करोड़ लोगों ने हमारे गठबंधन का अनुमोदन किया था।” नीतीश कुमार द्वारा तीन पार्टियों वाले महागठबंधन से अलग होने और राजग का दामन थाम लेने के बाद राज्यसभा सदस्य शरद यादव ने विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की है जिसमें कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं।

वहीं नीतीश कुमार ने शरद यादव के विचारों को कमतर करने का प्रयास करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अलग अलग विचार होते हैं और पार्टी नेताओं को जदयू की पटना में 19 अगस्त को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अपने विचारों को सामने रखने का मौका मिलेगा। नीतीश कुमार ने पटना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी की बिहार इकाई ने राजद से संबंध तोडऩे और भाजपा से हाथ मिलाने के निर्णय का अनुमोदन किया है।