बिहार में योजना राशि की कमी नहीं


पटना : वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दिकी की अध्यक्षता में राज्य के कार्य विभागों के योजना मद से संबंधित एक समीक्षा बैठक वित्त मंत्री के कार्यालय कक्ष में आहूत की गई। बैठक को संबोधित करते हुए श्री सिद्दिकी ने कहा कि किसी भी योजना के लिए राशि की कोई कभी नहीं है इसलिए प्राथमिकता के आधार पर बजट में उल्लेखित सभी योजनाओं को ससमय पुरा किया जाना चाहिए। साथ ही साथ मुख्यमंत्री के 7 निश्चय से संबधित सभी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने सख्त निदेश भी दिया। इस बैठक में श्री सिद्दिकी ने विभागीय प्रधानों से स्वीकृत राशि की निकासी एवं इसकी पार्किंग, योजनाओं की प्रगति एवं विभागवार कैलेन्डर के निर्धारण की स्थिती विस्तृत रूप से स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

श्री सिद्दिकी ने विकास आयुक्त के स्तर पर यह भी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया कि विगत् तीन वर्षों में जो योजना अबतक प्रारंभ नहीं हो सकी है, उन्हें अस्वीकृत करने में कौन-कौन सी कठिनाईयों हैं। उक्त बैठक में वर्ष 2017-18 वित्तीय वर्ष अन्तर्गत ली गई योजनाओं के पूर्ण होने के संबंध में विभागीय प्रधानों द्वारा वित्त मंत्री को ससमय पुरा कर लिए जाने का आश्वासन दिया गया। पावर प्वाइंट के माध्यम से बैठक के लिए निर्धारित एजेंडा के अनुरूप जल संसाधन विभाग की ओर से बतया गया कि बांधों के रखरखाव संबंधी प्रस्ताव को अगली जामा पहनाने का काम अन्तिम चरण में है।

बैठक में संयोजक की भूमिका निभा रहे वित्त विभाग के प्रधान सचिव डा. धर्मेन्द्र सिंग गंगवार ने श्रम-बल के रूप में मनरेगा को शामिल करने का सुझाव दिया। श्री सिद्दिकी ने ग्रामीण रोजगार की दिशा में इसे एक सकारात्मक पहल बताया। पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने सड़क एवं पुलों के निर्माण में हो रहे विलंब का कारण भूमि अधिग्रहण बताया। जिसके निराकरण के लिए स्थानीय प्रशासन की भी मदद ली जा रही है। पीएल खाता में पार्क की गई राशि के संबंध में बताया गया कि सिर्फ आरआई डीएफ एवं बाह्य संपोषित परियोजनाओं की राशि ही पार्क की गई है जिसे वित्तीय वर्ष के अन्त तक खर्च कर दिया जाएगा। प्रगति प्रतिवेदन निदेशानुसार पावर प्वांइट के माध्यम से प्रस्तूत किया गया।

ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से बताया गया कि स्वीकृत योजनाओं को पूर्ण करने के लिए कार्य योजना तैयार कर ली गई है एवं हर हाल में ससमय मूत्र्त रूप दे दिया जाएगा। बैठक में शिरकत कर रहे सभी विभागों के द्वारा स्वीकृत योजनाओं से संबंधित कैलेण्डर प्रस्तुत किया गया। वित्त मंत्री ने किसी भी योजना के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण मार्च 2018 तक बजट उपबंध के विरूद्ध माहवार अनुमानित खर्च का ब्यौरा देने का निर्देश दिया ताकि वित्त विभाग समेकित रूप से मासिक कैश-फ्लो का आंकलन कर सके।

तीन बरसों में प्रारंभ न हो सकी योजनाओं की समीक्षोपरांत बंद करने का निदेश देते हूए श्री सिद्दिकी ने कहा कि वैसी योजनाओं के विरूद्ध संबंधित विभाग बैंक ऑफ सेंक्शन (वित्तीय स्वीकृति) के तीन गुणा के अन्दर उपरोक्त बंद की गई स्कीम के बराबर नई योजना स्वीकृत करा ले। बैठक में सभी कार्य विभागों को नाबार्ड संपोषित आरआईडीएफ योजना के अन्तर्गत प्राथमिकता के आधार पर स्कीम स्वीकृत कराने हेतु प्रस्ताव भेजने का भी निदेश दिया गया।

भवन निर्माण विभाग को अन्य विभागों के कार्यालयों, आवासों एवं सरकारी भवनों के रख-रखाव के निमित्त स्वयं स्वीकृति प्रदान करने संबंधी प्रस्ताव देने का भी निर्देश दिया गया। उक्त बैठक में वित्त सचिव (संसाधन) एच. आर. श्रीनिवास, डा. दीपक प्रसाद, प्रधान सचिव योजना एवं विकास विभाग एवं अन्य उपस्थित थे।