लाचारी में लालू ने नीतीश को माना था नेता


पटना : बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)के घटक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर महागठबंधन तोडऩे के आरोप पर आज कहा कि श्री कुमार ने खुद को गठबंधन का नेता बनाने के लिए नहीं कहा था बल्कि श्री यादव ने अपनी राजनीति की डूबती नैया को बचाने के लिए महागठबंधन बनाया था। जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने यहां कहा कि श्री कुमार को महागठबंधन के नेता बनाने के लिए श्री यादव से लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) नेता मुलायम ङ्क्षसह यादव तक ने उनकी चिरौरी की थी, श्री कुमार उनके पास नहीं गए थे।

उन्होंने कहा कि राजद अध्यक्ष ने अपनी डूबती राजनीतिक नैया को बचाने के लिए महागठबंधन बनाने की कवायद शुरु की और जब नेता चुनने की बारी आई तो श्री कुमार के सामने प्रस्ताव रखा गया कि वह गठबंधन के नेता बनें। श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में पूरे देश में मोदी लहर के बावजूद यह श्री कुमार की छवि ही थी कि महागठबंधन को 2015 के विधानसभा चुनाव में सफलता मिली थी। उन्होंने श्री यादव को नसीहत दी कि वह काल्पनिक बातों को छोड़कर यथार्थ की बात करें। उन्होंने कहा कि श्री कुमार महागठबंधन के नेता अपनी शर्तों पर बने थे और जब उनसे छल किया जाने लगा तो उन्होंने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया।

जदयू प्रवक्ता ने पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि चंपारण से यात्रा शुरू करने के बयान पर कहा कि अरबों रुपये की अकूत संपत्ति जमा कर चुके श्री यादव को इस संपत्ति का त्याग करने के बाद ही महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक वह अपने पिता लालू प्रसाद यादव से मिले धन का उपयोग करते रहेंगे तब तक उनकी इस यात्रा का कोई मतलब नहीं होगा। श्री सिंह ने बिहार के विकास के लिए श्री कुमार ने राजग का रास्ता चुना है। केंद्र और राज्य में एक ही सरकार होने से बिहार के विकास में अब कोई रुकावट नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि देश की जनता ने केंद्र के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुना है तो यह राजद अध्यक्ष को समझना होगा कि जनता क्या चाहती है। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र की राजग सरकार ने देश हित में कई अहम फैसले लिए हैं जिनमें नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शामिल हैं। सरकार के इन फैसले से आम लोगों को काफी लाभ हुआ है। आरजेडी नेताओं को समझना होगा कि राज्य और देश की जनता क्या चाहती है।