नीतीश कुमार ने जनता को धोखा दिया है : तेजस्वी


पटना : बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वासमत हासिल करने के पूर्व प्रतिपक्ष के नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार व भाजपा पर जबरदस्त हमला किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार आज आरएसएस व भाजपा की गोद में जा बैठे हैं। महागठबंधन की सरकार गिराकर उन्होंने जनता को धोखा दिया है। सब कुछ पहले से तय था। केवल तेजस्वी यादव तो बहाना था भाजपा में जाना तय था। विश्वास मत के दौरान गुप्त मतदान की बात नहीं मानी गई।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विधानसभा में राजद, कांग्रेस व माले ने एनडीए की सरकार के विश्वास मत के विरोध में वोट दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने महागठबंधन को मैंडेट दिया था। आज जनता खुद को ठगा और अपमानित महसूस कर रही है। नीतीश कुमार आरएसएस व भाजपा की गोद में जा बैठे हैं। उन्होंने उनके इस्तीफा को लेकर बहाना बनाया गया। सब पहले से कुनबा तैयार कर बैठे थे, अगर वे इस्तीफा दे भी देते तो नीतीश कुमार भाजपा के साथ जाते।

तेजस्वी ने कहा कि भ्रष्टाचार का मामला तो लालू प्रसाद पर पहले से था तो क्या नीतीश कुमार अस्तित्व बचाने के लिए उनके साथ आए थे? तेजस्वी बोले के वे केवल 28 साल का नौजवान होकर भी आरएसएस व भाजपा के सामने नहीं झुके। लेकिन राजनीति के बड़़े खिलाड़ी नीतीश कुमार ने घुटने टेक दिए। 28 वर्ष के उम्र में जब राज्य का उपमुख्यमंत्री बना तो युवाओं में भारी जोश खरोश जगा और देश के 60 प्रतिशत युवा ने महागठबंधन के पक्ष में खड़े हो गये थे लेकिन नीतीश कुमार एक ही झठके में उन युवाओं के अरमान पर ठेंस पहुंचाते हुए एनडीए गठबंधन मेंचले गये।

हमने बीस माह में कौन सी गलती की कि नीतीश कुमार बिना बताये ही राजद और कांग्रेस छोड़कर एनडीए में चले गये। नीतीश कुमार की छवि ही नहीं बल्कि उनकी राजनीतिक वजूद को बचाया है। जब जब नीतश कुमार अकेले लड़े तो 1995 में 324 सीटो में मात्र सात सीट पर ही सीमट कर रह गये। 2014 के लोकसभा चुनाव में मात्र दो सीट ही जीत पाये। इन्होंने गठबंधन का सहारा कभी भाजपा तो कभी राजद व कांग्रेस के साथ सत्ता में काबिज हुआ। नीतीश कुमार ने विचारधारा एवं सिद्धांत से समझौता कर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया। यह एक राजनीतिक हत्या है। श्री यादव ने कहा कि नीतीश कुमार एक सुनियोजित ढंग से सोंची समझी साल के तहत एक परिवार पर ईडी, सीबीआई एवं आयकर विभाग का छापामारी करवाकर छवि को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं।

महागठबंधन में इनका कभी कोई दवाब नहीं बनाया गया। जब लालू जी के परिवार के घरर पर सीबीआई का रेड पड़ता है तो मुख्यमंत्री जी बीमार हो जाते हैं जब सोनिया गांधी से बात करने की बात आती है तो वे बीमार हो जाते हैं। प्रधानमंत्री के लंच में बुलावे पर सीधे चले जाते हैं। हमलोग इतना मुर्ख नहीं है। मैं हमेशा नौजवानों के साथ रहा हॅू। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि दुनिया का पहला खजांची आरबीआई है, जिसमें नोटबंदी में कितना पैसा आया इसकी भी जानकारी नहीं है। एक ओर वे गांधी के सम्मान में पदयात्रा करते हैं उस समय हे राम का नारा बुलंद करते हैं वहीं दूसरी ओर गांधी के हत्यारों के साथ अब जय श्री राम का नारा लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारधारा को तिलांजलि देते हुए गौड्से के विचारधारा को अपना लिया है। मुख्यमंत्री एनडीए गठबंधन से हटने के बाद कहा था कि हम मिटटी में मिल जायेगे लेकिन भाजपा में नहीं जायेंगे। इनके पास ईमानदारी व सिद्धांत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सामाजिक न्याय के साथ खड़े हैं और राज्य के गरीबों, दलितों, शोषितों एवं अल्पसंख्यकों के बीच ये सारे मामले को ले जायेंगे। लालू जी पुत्र मोह में नहीं भाई मोह में पड़कर नीतीश कुमार को गदद्दी पर बैठाया था।

उन्होंने एनडीए सरकार के गठन की पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी हाने के बावजूद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का मौका देने से इन्कार कर दिया। फिर विधानसभा में गुप्त मतदान की उनकी बात नहीं मानी गई। अगर गुप्त मतदान होता तो सत्ताधारी दलों के कई विधायक विश्वास मत के विरोध में जाते। तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने विधान सभा में भी कई सवाल रखे। लेकिन नीतीश कुमार तथा जदयू-भाजपा के लोगों ने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया। बिहार की जनता को वे क्या तवाब देंगे? जनता ही उन्हें सबक सिखाएगी।