बेचैनी झलक रही है लालू में


पटना : जेडीयू मुख्य प्रवक्त और विधान पार्षद संजय सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा है कि लालू यादव अभी बेचैनी में है। सत्ता जाने के बाद इनको कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि वो क्या करें क्या ना करें। आरजेडी के नेता इनदिनों जो बयान बाजी कर रहे हैं उनको यह समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या बोल रहे हैं। लालू यादव अपने मन से यह बात निकाल दें कि उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया है। नीतीश कुमार को तो बिहार की जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया है। आरजेडी के नेता खुशफहमी ना पालें मुख्यमंत्री बनने की काबिलियत सिर्फ एक व्यक्ति में थी जिसका नाम नीतीश कुमार था।

नीतीश कुमार के बदौलत ही महागठबंधन को इतनी सीटें आई थी। लालू यादव और उनका परिवार इस गलतफहमी में है कि उनके बदौलत महागठबंधन को इतनी सीटें मिली थी। लालू यादव तो 2010 में लॉस्ट केस थे। 2015 में आरजेडी को नीतीश कुमार ने जिंदा किया। 2010 में आरजेडी को मात्र 22 सीटें आई थी। नीतीश कुमार चेहरा बने तो आरजेडी 80 सीट के आंकड़े पर पहुंची थी। लालू यादव जी को समझ में आ जाना चाहिए कि नीतीश कुमार किसी की चरण वंदना नहीं करते हैं।

नीतीश कुमार अपनी शर्तों पर अपनी राजनीति करते हैं। राजनीति में उनका व्यक्तित्व ही ऐसा है कि उनके सामने सभी बौने साबित हो जाते हैं। यही वजह है कि आरजेडी के नेताओं को नीतीश कुमार खटकने लगे थे। उन्हें लगने लगा था कि नीतीश कुमार के चेहरे के सामने और कोई नेतृत्व नहीं उभर सकता है। नीतीश कुमार को किसी के नाम की जरूरत नहीं है। बिहार की जनता के लिए नीतीश कुमार का नाम विश्वास का नाम है जो न्याय के साथ विकास का काम करता है।

नीतीश कुमार किसी भी गठबंधन के साथ रहे वो अपने काम और अपने व्यक्त्त्वि के लिए जाने जाते हैं और जाने जाएंगे। बिहार की जनता जानती है की राज्य का कौन विकास कर रहा है और आगे कौन विकास करेगा। नीतीश कुमार भ्रष्टाचार से समझौता कभी नहीं कर सकते और उन्होंने इसी वजह से महागठबंधन का साथ नहीं दिया। नीतीश कुमार का एक ही लक्ष्य है कि वो बिहार का विकास करें। अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह लगातार प्रयासरत है। बिहार की जनता भी ये जानती है और समझती है।