मां के साथ चूड़ियाँ बेचने वाला बना आईएएस


पटना : सोशल मीडिया में एक खबर आयी है कि झारखंड मंत्रालय एक विभाग में 287 रैंक के एक आईएएस अफसर जो विभाग के संयुक्त सचिव है जो मां के साथ चूड़ियाँ बेचता था आज वह आईएएस अफसर है। ऐसा कहा जाता है कि सपने वह नहीं होते जिसे सोते देखा जाता है बल्कि सपने तो वह होते हें जो इंसान को सोने नहीं देता। मां के साथ चूड़ियाँ बेचने वाले रमेश घोलक की कहानी इसी तरह है। वह महाराष्ट्र के महागांव के रहने वाले रमेश अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी नींद को भी छोड़ दिया था। रमेश का बचपन इतनी कठिनाई के साथ बीता कि उन्होंने अपनी मां के साथ गलियो में चूड़ियाँ बेचना पड़ा था।

उनके पिता की एक साइकिल की दुकान थी लेकिन रमेश के पिता को शराब कीलत इतना था कि सारा कमाई शराब की भेंट चढ़ा देते थे। इतना नहीं बचपन में पोलियो होने के कारण वह विकलांग भी हो गये थे। अपनी कमियों पर ध्यान नहीं देकर उन्होंने अपना सारा ध्यान अपनी पढ़ाई पर लगाई। रमेश से संघर्ष के बारे में बातचीत की तो उन्होंने बताया कि संघर्ष के समय कुछ दिन ऐसे भी आये जहां अन्न का एक दाना भी नहीं हुआ करता था लेकिन हमने ठान लिया था कि आईएएस अफसर बनने का सपना। जैसे-तैसे पैसा जमा करके रमेश अपनी आंखों के सपने लिये पूणे पहुंच गये। आज वह आईएएस बनकर महाराष्ट्र अपने महागांव के सपने को साकार किया और मां पिता के गरीबों क सपने को भी साकार किया। आज रमेश 287 बैच का झारखंड मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर है।