कृषि रोड मैप में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर विशेष ध्यान


कृषि मंत्री डा. प्रेम कुमार ने कहा कि तीसरे कृषि रोड मैप 2017-22 में फसलों की सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई पद्धति पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस पद्वति से फसलों की सिंचाई करने पर फसल की उत्पादकता में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी साथ सिंचाई जल की भी काफी बचत होगी। सूक्ष्म सिंचाई एक उन्नत सिंचाई प्रणाली है जिसके द्वारा पौधे के जड़ क्षेत्र में विशेष रूप से निर्मित प्लास्टिक पाईपों द्वारा एक निश्चित समय अन्तराल पर पानी दिया जाता है। सिंचाई की इस प्रणाली से पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 60 प्रतिशत कम जल की खपत होती है। इस प्रणाली के अन्तर्गत ड्रीप सिंचाई पद्धति, स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति एवं रेनगन सिंचाई पद्धति का उपयोग किया जाता है।

इसके अन्तर्गत जल वितरण लाइनो और साज-सामान कन्ट्रोल हेड प्रणाली एवं उर्वरक टैंक रहते हैं। इस सिंचाई प्रणाली से फसल की उत्पादकता में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है तथा उत्पाद की गुणवता भी उच्च होती है। इस सिंचाई प्रणाली से मजदूरी की लागत खर्च में कमी के साथ-साथ पौधों पर रोगों के प्रकोप में भी कमी आती है। कृषि मंत्री ने कहा कि इस प्रणाली को अपनाने से लगभग 25 से 30 प्रतिशत उर्वरक की बचत होती है।

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 में इस सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने हेतु प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रारंभ की गयी है। वर्तमान में बिहार में यह सिंचाई प्रणाली कुल आच्छादान क्षेत्र का लगभग 0.5 प्रतिशत क्षेत्र में ही अपनाया जा रहा है। कृषि रोड मैप, 2017-22 में इस प्रणाली को कम-से-कम कुल आच्छादन क्षेत्र के लगभग 2 प्रतिशत क्षेत्र में प्रतिष्ठापित किये जाने का लक्ष्य है, ताकि बिहार के सब्जी एवं फल के उत्पादन एवं उत्पादकता में बढ़ोतरी हो सके।

उन्होंने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत किसानों को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त टॉप-अप प्रदान करते हुये सभी श्रेणी के कृषकों को 75 प्रतिशत सहायता अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत् कुल 117.54 करोड़ रुपये की लागत पर 13,286 हे. के लिए योजना का कार्यान्वयन किया जाएगा। इस योजना के कार्यान्वयन से आच्छादित क्षेत्र के किसानों को उत्पादन लागत में कमी के साथ शुद्ध लाभ में काफी वृद्धि होगी।