शिक्षा की बदहाली से राज्य की छवि खराब


पटना : इंटर परीक्षा परिणाम के विवाद से घबराकर बिहार सरकार ने मैट्रिक परीक्षा का परिणाम ‘क्राइसिस मैनेज’ करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया, ऐसा प्रतीत होता है। बिहार की शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान बदहाली ने देश-दुनिया में राज्य की छवि को धूमिल किया है जिसके जिम्मेदार नीतीश कुमार हैं।

बिहार भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने राज्य के जारी मैट्रिक परीक्षा परिणाम पर सफल छात्रों को बधाई देते हुए बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर नीतीश कुमार को आड़े हाथों लिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि इंटर परीक्षा परिणाम में लगातार तीन सालों से हो रही गड़बड़ी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी थी और अब मैट्रिक परीक्षा परिणाम के बाद सरकार वाहवाही बटोरने में लगी दिखाई देती है।

इंटर की परीक्षा में 12 लाख में से 8 लाख छात्र असफल हुये थे और मैट्रिक की परीक्षा लगभग 16 लाख छात्रों में से 8 लाख असफल हुये थे। इस आधार पर आंकड़ों को देखें तो मैट्रिक की परीक्षा से 12वीं की परीक्षा के बीच 4 लाख छात्र की संख्या घट जाती है। यही नहीं बिहार में 9वीं-10वीं और 11वीं-12वीं में कुल छात्रों की संख्या अगर कम से कम 50 लाख भी मान लें तो इन कक्षाओं के छात्रों के लिये बिहार में 50 हजार के लगभग शिक्षक मौजूद हैं जो छात्र-शिक्षक के राष्ट्रीय अनुपात के मुकाबले काफी कम है।

नित्यानंद राय ने नीतीश कुमार से सवाल पूछा है कि इंटर और मैट्रिक दोनों परीक्षा परिणाम के बाद 16 लाख के लगभग छात्र असफल हो गये हैं। और इन परीक्षाओं में अगले साल जो 26 लाख छात्र परीक्षा देंगे उनके लिये सरकार की नीति क्या है? इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को मैनेज करने के लिये लाखों शिक्षकों की भर्ती करनी होगी उसके लिये सरकार की क्या नीति है?

श्री राय ने बिहार सरकार से बिहार की शिक्षा में सुधार के लिये खानापूर्ति की जगह गंभीर प्रयास करने की सलाह दी है ताकि बिहार के लाखों छात्रों, शिक्षक बनने के योग्य अभ्यर्थियों और अभिभावकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो।