रायपुर : छत्तीसगढ़ के चुनावी मिशन में सत्ताधारी दल भाजपा ने अब फील्ड में ताकत झोंकने की पूरी तैयारी कर ली है। यही वजह है कि संगठन के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने प्रदेश की तैयारियों को गंभीरता से लिया है। रमन सरकार के चुनावी बजट आने के बाद विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के मुद्दे पर आम लोगों के बीच जाने की रणनीति है। बजट से भावी फायदो और अंत्योदय वर्ग को लाभान्वित करने के दावों के साथ भाजपा के नेता मैदान में उतरेंगे।

सूत्रों के मुताबिक सत्ताधारी दल के चुनावी मोड में आने के साथ संगठन की रणनीतियों को आगे बढ़ाने खुद राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री और प्रभारी ने मोर्चा संभाला हुआ है। सत्ताधारी दल के मिशन 65 के लक्ष्य को साधने के लिए एक-एक सीटों पर एक्सरसाईज हो रही है। वहीं सरकार की ओर से भी योजनाओं का फायदा आम लोगों तक पहुंचाने क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है।

चुनावी मैदान में एंटी इंकमबेंसी फैक्टर से जूझने के साथ विपक्ष की रणनीतियों को ध्वस्त करने की भी रणनीतिकारों के सामने बड़ी चुनौती होगी। छत्तीसगढ़ में चुनावी सरगर्मियां शुरू होने के साथ विपक्षी दलों की चुनौतियों से निपटने अंदरूनी तौर पर रणनीति तैयार हुई है। इस मामले में नए सिरे से रणनीतियों में आंशिक बदलाव करते हुए प्लान बनाया गया है।

शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलन बरकरार रखते हुए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। रमन सरकार के चुनावी बजट में आदिवासी एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग पर फोकस किया गया है। सीधे तौर पर सरकार एवं सत्ताधारी दल की नजर आदिवासी एवं दलित आरक्षित सीटों पर टिकी हुई है। बीते चुनाव में आदिवासी बेल्ट में मिली हार के बाद खामियों को दूर करने की भी कोशिशें नजर आने लगी है।

इसके बावजूद अनुसूचित जाति आरक्षित दस सीटों पर भी रणनीतिकारों का फोकस है। मैदानी क्षेत्रों में सत्ताधारी दल पहले ही कुछ मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। माना जा रहा है कि विधानसभा का बजट सत्र खत्म होने के बाद सरकार के साथ भाजपा पूरी तरह चुनावी रंग में नजर आएगी।

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