तेंदूपत्ता की लेवी वसूली के लिए नक्सलियों की गतिविधि हुई तेज


जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में हरा सोना कहे जाने वाले तेन्दूपत्ता की लेवी वसूली के लिए नक्सलियों की गतिविधियां तेज हो गयी है। नक्सलवाद को करीब से जानने व समझने वाले हमेशा से यह दलील देते रहे हैं कि नक्सलियों के आर्थिक स्त्रोतों पर अंकुश लगा दिया गया तो बस्तर से नक्सलियों की सफाये में ज्यादा देर नहीं लगेगी। इसके बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कारगर कदम शासन स्तर पर उठाया जाता हुआ नजर नहीं आता। सम्भवत: इसी कारण से बस्तर में नक्सलियों को फलने -फूलने का पर्याप्त अवसर और उर्वरा शक्ति मिलती रही है। अब जैसे ही तेन्दूपत्ता की तुड़ाई प्रारम्भ हुई इसके साथ ही नक्सलियों की गतिविधियों में अचानक तेजी देखी जाने लगी है। जिसका परिणाम नक्सली अपनी मौजूदगी दर्शाने के लिए बड़ी घटनाओं को अंजाम देने में सफल हो गये हैं, जिसके बाद तेन्दूपत्ता की लेवी के करोड़ों की वसूली का मार्ग प्रशस्त हो गया है। जिस पर शासन की कोई कार्ययोजना नजर नहीं आती जिससे नक्सलियों के सबसे बड़े आय के स्त्रोत पर अंकुश लग सके।

यह भी सर्व विदित है कि केन्द सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद नक्सलियों की आर्थिक रीड़ को तोड़ कर रख दिया था। जिसके बाद यह सबसे अच्छा सुअवसर था कि नक्सलियों की आर्थिक नाकेबंदी पर पुख्ता और कारगर कदम शासन को उठाना चाहिए था जिससे बस्तर की नक्सलवाद का समाधान का मार्ग प्रशस्त होता, लेकिन ऐसा हो नहीं सका और नक्सली अपने आर्थिक स्त्रोत तेन्दूपत्ता की लेवी वसूली के लिए पूरी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यदि शासन स्तर पर नक्सलियों के द्वारा तेन्दूपत्ता की लेवी वसूली पर अंकुश लगाने में सफलता नहीं मिलती है तो इसे बस्तर में बंद कर दिया जाना नक्सली समस्या का समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। भले ही स्थानीय ग्रामीणों का इससे कितना ही नुकसान क्यों न हो। लेकिन शासन स्तर पर नक्सलियों के इस सबसे बड़े आर्थिक स्त्रोत को बंद करने की इच्छाशक्ति नजर नहीं आती है।

वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर नक्सलियों के डर से लेवी देना उचित समझा जाता है और इसकी कोई शिकायत थाने में दर्ज नहीं होती है। बस्तर में तेन्दूपत्ते का पूरा कारोबार नक्सलियों के लेवी वसूली पर खुलेआम संचालित हो रहा है। बगैर किसी अड़ंगे के वन विभाग के द्वारा बकायदा निर्धारित लक्ष्य 22 हजार एक सौ मानक बोरा 106 खरीदी संग्रहण केन्द, तथा 13 समितियों के माध्यम से तेन्दूपत्ता तोड़ाई से लेकर खरीदी और उसे रखे जाने तथा परिवहन करने का कार्य नक्सलियों के बेरोकटोक किया जाना धूर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बगैर नक्सलियों के संरक्षण के संभव नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शासन स्तर पर भी नक्सली समस्या के उन्मूलन के लिए गंभीरता नहीं है।

जवानों की शहादत के बेकार नहीं जाने की घिसे -पिटे बयान से इन हालातों में बस्तर की नासूर बन चुके नक्सली समस्या का समाधान संभव नहीं हो सकता है। यदि शासन स्तर पर करोड़ों की लेवी पर अंकुश लगा दिया जाए तो इसमें कोई भी संदेह नहीं है कि बस्तर में नक्सली समस्या का समाधान जल्द ही हो सकता है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑपरेशन महेश्वर नाग का कहना है कि क्षेत्र मे नक्सलियों की हलचल बढ़ी है। सूत्रों से यह बात पता चली है कि नक्सली तेन्दूपत्ता ठेकेदारों से लेवी वसूली करते हैं पर किसी ठेकेदार ने इसकी शिकायत दर्ज नहीं कराई है। डीएफओ रमेश चंद, दुग्गा के अनुसार नक्सलियों के लेवी वसूली की कोई अधिकारिक शिकायत नहीं आयी है। सब कुछ अब तक ठीक-ठाक चल रहा है। तेन्दूपत्ता के संग्रहण का कार्य तेजी से जारी है।

(वार्ता)