रेरा के गठन से मिलेगी राहत, डेवलपर्स में अंदरूनी खलबली


रायपुर: छत्तीसगढ़ में रियल इस्टेट विनियामक प्राधिकरण में नए अध्यक्ष को लेकर राज्य शासन स्तर पर कवायदें तेज हो गई हैं। रेरा के चेयरमैन के तौर पर किसी वरिष्ठ आईएएस को कमान दी जा सकती है। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री रमन ङ्क्षसह ने इस मामले में कुछ अफसरों के नाम पर विचार किया है।  वहीं सेवानिवृत्त हो चुके कुछ वरिष्ठ आईएएस अफसरों के नाम पर भी प्रस्ताव तैयार है। इनमें डीएस मिश्र और एनके. असवाल जैसे आईएएस अफसरों की चर्चा है। केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार ने भी रेरा का गठन किया है। इसमें बिल्डरों एवं डेवलपर्स की मनमानी और उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।

वहीं सरकार ने प्राधिकरण को सिविल न्यायालय की तरह अधिकार दिए हैं। इसका उल्लंघन करने पर कड़ी सजा और जेल तक हो सकती है। इस मामले में सरकार की ओर से चेयरमेन नियुक्त नहीं होने से कामकाज भी शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि सरकार ने 31 जुलाई तक चेयरमैन नियुक्त कर देने के संकेत दिए हैं। इनमें असवाल और मिश्र में से किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है। इधर प्राधिकरण आवासीय और कारोबारी दोनों ही परियोजनाओं में पैसों के लेनदेन पर कड़ी नजर रखेगी। वहीं डेवलपर केवल वे ही प्रोजैक्ट बैच पाएंगे जो पंजीकृत हैं। वहीं बड़ी सभी निर्माण परियोजनाओं को प्राधिकरण में पंजीकृत कराने की भी  बाध्यता होगी।

परियोजनाओं से संबंधित सभी गतिविधियों में पारदर्शिता बरतने के दावे किए जा रहे हैं। इधर रेरा के गठन के बाद से ही राजधानी समेत प्रदेश भर में बिल्डर्स में अंदरूनी खलबली भ्ीा मची हुई है। किसी भी तरह कि विवादों का निपटारा प्राधिकरण में होगा। इसके लिए भी अधिकतम 60 दिनों की समय सीमा तय की गई है।

वहीं ग्राहकों की ओर से ली जाने वाली 70 फीसदी राशि को बैंक में रखना भी अनिवार्य किया गया है। इस राशि से ही निर्माण कार्य होंगे। माना जा रहा है कि प्राधिकरण की ओर से कामकाज शुरू होने के बाद स्थिति में कुछ बदलाव हो सकता है। वहीं आम लोगों को राहत मिल पाएगी।