तबादलों पर प्रतिबंध हटाने सत्ताधारी दल के विधायकों का दबाव


रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी महकमें के स्थानांतरण को लेकर फैसले के अभाव में सरकार पर दबाव बढ़ गया है। राज्य सरकार ने अब तक इस साल के लिए तबादला नीति घोषित नहीं की है। वहीं तबादलों पर प्रतिबंध नहीं हटाने की वजह से सरकारी विभागों में तबादले के आवेदन समन्वय में भेजने पड़ रहे हैं। इस मामले में सत्ताधारी दल के विधायकों ने सीधे मुख्यमंत्री रमन सिंह से गुहार लगाई है।

वहीं पत्रों में कहा गया है कि तबादला नीति घोषित नहीं होने की स्थिति में उनकी पसंद पर अफसरों और कर्मचारियों के स्थानांतरण किए जाएं। ऐसा नहीं हुआ तो उनकी बड़ी फजीहत हो सकती है। चुनावी साल में प्रवेश करने से पहले सत्ताधारी दल की ओर से जनप्रतिनिधियों के दबाव पर फिलहाल सरकार का रुख स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि तबादला नीति घोषित करने के लिए आगामी कैबिनेट की बैठक का इंतजार किया जा रहा है।

कैबिनेट में इस पर निर्णय नहीं हुआ तो सत्ताधारी दल के विधायक फिर से सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं। इधर राज्य सरकार अमूमन जून के पहले पखवाड़े में ही तबादलों पर प्रतिबंध हटाती रही है। वहीं जुलाई के पहले पखवाड़े की समाप्ति के साथ ही प्रतिबंध फिर प्रभावी होता रहा है। बीते सालों में तबादला नीति घोषित होने के बाद हजारों कर्मचारियों ने अपने स्थानांतरण को न्यायालय में चुनौती दे दी थी। वहीं सरकार को कोर्ट में जवाब देने के लिए मशक्कतें भी करनी पड़ी।

हालांकि राज्य शासन ने विवादित तबादलों के निपटारे के लिए सचिव स्तरीय समिति का भी गठन किया लेकिन इसमें अभ्यावेदनों के निपटारे में ही छह माह से अधिक बीत जाने पर भी कोई निर्णय नहीं होने से आक्रोश बढ़ा था। पूर्व में सत्ताधारी दल के विधायकों और सांसदों की ओर से तबादलों के लिए की गई सिफारिशों में ज्यादातर प्रकरणों पर अमल नहीं होने से भी नाराजगी सामने आई थी। यही वजह है कि सरकार अब इस मामले में कोई शिथिलता दे सकती है। तबादला नीति घोषित करने के मामले में सरकारी कर्मचारियों का भी दबाव बढऩे लगा है।