फिर घिरे जोगी : कोर्ट से नहीं मिलेगा स्टे


रायपुर: फर्जी जाति के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की मुश्किलें बढ़ गई है। फर्जी जाति मामले की जांच के लिए गठित हाईपावर कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद जोगी फिर झंझावतों में घिरते नजर आ रहे हैं। हाईपावर कमेटी ने जोगी की जाति आदिवासी नहीं होने की पुष्टि कर दी है। इधर इस फैसले को चुनौती देने खुद जोगी हाईकोर्ट में स्टे लेने की तैयारी में थे। इससे पहले ही याचिकाकर्ता संतराम नेताम ने केविएट दाखिल कर जोगी का खेल बिगाड़ दिया।

इस मामले में सियासत फिर गरमा गई है। जोगी की जाति को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने लगातार मामला सदन एवं सदन के बाहर उठाया था। वहीं जोगी की जाति के मामले में राज्य सरकार पर कार्रवाई नहीं करने पर भी घेरेबंदी की थी। इधर हाईपावर कमेटी ने साफ कर दिया कि जोगी के पूर्वज आदिवासी नहीं थे। इस मामले में उनके पिता की जाति अनुसूचित जाति के होने का हवाला दिया गया है।

वहीं उनकी माता आदिवासी वर्ग से है। इसके अलावा पिता द्वारा खरीदी गई जमीन के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं लेने का जिक्र हैं। आदिवासी होने पर ही प्रशासन से जमीन खरीदी पर अनुमति ली जाती है। हाईपावर कमेटी की ओर से जोगी के जाति आदिवासी नहीं होने को साबित करने के बाद उनकी विधानसभा सीटों पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामला जोगी के विपरीत रहा तो खुद जोगी समेत उनके पुत्र सुरक्षित सीटों से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जोगी की जाति का मामला करीब एक दशक से अधिक समय से लंबित पड़ा हुआ है।

हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट काफी पहले ही आ चुकी थी। इसके बावजूद सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया था। इधर चुनावी तैयारियों के बीच जाति का जिन्न फिर बाहर निकलने से जोगी के लिए राजनीतिक मुश्किलें हो सकती है। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता नंदकुमार साय प्रतिद्वंदी के तौर पर सामने थे। उन्होंने उस चुनाव में जीत पर सवाल उठाते हुए भी चुनाव याचिका लगाई है। साय के साथ संतराम नेताम ने भी जोगी की जाति को चुनौती
दी थी।