कांग्रेस ने आतंकवाद तथा घुसपैठ की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार पर ठोस कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज वही पांच सवाल किये जिनका मोदी ने पांच साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री से जवाब मांगा था। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यहां पार्टी की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि मोदी ने पांच वर्ष पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर आतंकवाद की घटनाओं को रोकने में असफल रहने का आरोप लगाते हुए उनसे पांच सवाल किये थे लेकिन मोदी के सत्ता में आने के बाद स्थित कई गुना खराब हो गयी है लेकिन वह चुप्पी साधे हुए हैं।

प्रवक्ता ने एक जन सभा में  मोदी द्वारा पांच साल पहले दिये गये एक भाषण का वीडियो पत्रकारों को दिखाया और ठीक वही सवाल दोहराते हुए उनसे पूछा ‘हमें जवाब दीजिये कि ये जो आतंकवादी है, उनके पास जो बारूद और शस्त्र हैं वो कहाँ से आते हैं? वो तो विदेश की धरती से आते हैं? और सीमायें संपूर्ण रूप से आपके कब्जे में हैं? सीमा सुरक्षा बल आपके कब्जे में है।’

मोदी की शैली में ही प्रवक्ता ने अगला सवाल दोहराया ‘हम आपसे दूसरा सवाल पूछना चाहते हैं, आतंकवादियों के पास धन आता है, कहां से आता है, पैसे के पूरे लेन देन का कारोबार भारत सरकार के कब्जे में है। रिजर्व बैंक के अंतर्गत है, बैंकों के माध्यम से होता है, क्या प्रधानमंत्री आप इतनी निगरानी नहीं रख सकते कि यह जो धन विदेश से आकर आतंकवादियों के पास जाता है, आपके हाथ में हैं, आप उसको क्यों नहीं रोकते हैं।’

तीसरा सवाल भी उन्हीं की भाषा में पूछते हुए सिंघवी ने कहा ‘विदेशों से जो घुसपैठिये आते हैं, जो आतंकवादियों के रूप में आते है, आतंकवादी घटना करते हैं और भाग जाते हैं, प्रधानमंत्रीजी आप हमें बताइये, सीमायें आपके हाथ में हैं, तटीय सुरक्षा आपके हाथ में है, सीमा सुरक्षा बल, सेना सब आपके हाथ में है, नौसेना आपके हाथ में है,ये विदेश से घुसपैठिये कैसे देश में घुस जाते है?’ कांग्रेस ने चौथा सवाल भी मोदी के ही अंदाज में पूछा ‘हम चौथा सवाल पूछते हैं, सारी संचार व्यवस्था आपके हाथ में है, कोई भी अगर टेली़फोन पर बात करता है, ई-मेल करता है, कोई कम्युनिकेशन करता है, भारत सरकार उसको अवरुद्ध कर सकती है, अवरुद्ध करके जानकारियां पा सकती हैं कि आतंकवादी क्या बात कर रहे हैं और आप उसे रोक सकते हो। हम पूछना चाहते हैं, और आपका ही सवाल दोहरा रहें है- प्रधानमंत्री मोदीजी, इस बारे में आपने क्या किया है?’

पार्टी ने आखिरी सवाल आतंकवादियों के प्रत्यर्पण के बारे में उन्हीं की शैली में पूछा ‘हम पांचवां सवाल पूछते हैं, विदेशों में जो आतंकवादी भाग चुके हैं, विदेश में बैठ कर के जो हिंदुस्तान में आतंकवादी घटनाएँ कर रहे है, उनका प्रत्यर्पण कर विदेश से हिंदुस्तान लाने का हमें अधिकार होता है, आपकी विदेश नीति में क्या ताकत है? एक बार इन पांचों चीत्रो पर कुछ करके दिखाइए, आतंकवाद जड़-मूल से उखड़ जाएगा?’ सिंघवी ने कहा कि मोदी सरकार के पास विपक्ष के सवालों के जवाब नहीं हैं क्योंकि उसके कार्यकाल में आतंकवाद, घुपसैठ और संघर्ष विराम की घटनाएं कई गुना बढी हैं। हर सवाल पर मोदी चुप्पी साध लेते हैं और सवालों का ठोस जवाब देने की बजाय राष्ट्रवाद तथा जुमलों के रूप में उत्तर देने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि अब जवाबदेही निभानी होगी और ठोस आधार पर जवाब चाहिए जुमलों से काम नही चलने वाला है। प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार के 45 माह के कार्यकाल में आतंकवाद की 207 बड़ी घटनाएं हुई हैं जबकि संप्रग सरकार के 45 माह में 96 घटनाएं हुई थीं। इसी तरह से जम्मू कश्मीर में इस अवधि में 286 जवान शहीद हुए हैं जबकि संप्रग के समय इतनी अवधि में 115 जवान शहीद हुए थे। इस सरकार के कार्यकाल में हिंसा में 138 आम नागरिक मारे जा चुके हैं जबकि संप्रग में यह आंकडा 72 था। मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में संघर्ष विराम की 2555 घटनाएं हो चुकी हैं जबकि संप्रग के समय 45 माह में 543 घटनएं हुई थीं। संघर्ष विराम की घटनाओं में तब 19 जवान शहीद हुए थे लेकिन मोदी सरकार के दौर में अब तक 62 जवान शहीद हो चुके हैं।

24X7 नई खबरों से अवगत रहने के लिए यहां क्लिक करें ।