एनआरसी के मुद्दे पर पुरे देश में हंगामा मचा हुआ है ऐसे में पूरे देश की निगाहे 31 दिसंबर पर टिकी हुई है जब लाखों लोगो की किस्मत का फैसला होगा जी हां असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को भारत की नागरिकता दिए जाने का मुद्दा एक अहम पड़ाव पर पहुंचने वाला है। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस के पहले ड्राफ्ट की घोषणा होने वाली है । यह तय हो जाएगा कि असम में रह रहे लाखों मुसलमान भारत के नागरिक कहलाए जाएंगे या नहीं।

एनआरसी से उम्मीद जताई जा रही है कि असम में दशकों से हो रही अवैध प्रवासन के मुद्दे को हल करने में मदद करेगा। राज्य की कुल आबादी का एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों का है। इनमें 90 प्रतिशत मुसलमान प्रवासी हैं और बांग्ला बोलते हैं उन पर बांग्लादेशी होने का धब्बा लगा है जिसे मिटाने में एनआरसी उनकी मदद कर सकता है। दूसरी तरफए बांग्ला बोलने वाले हिंदुओं के असम में आने को लेकर कोई विवाद नहीं है। कहा जा रहा है कि एनआरसी से उन्हें फायदा ही मिलेगा।

भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार पहले से नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करने की कोशिश कर रही है ताकि 1971 के बाद असम की सीमा में घुसे हिंदुओं को भारत की नागरिकता मिल सके। गौरतलब है कि 1985 में हुए असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 की मध्यरात्रि से पहले असम आए हर व्यक्ति को भारतीय नागरिक माना जाएगा। एनआरसी के अधिकारियों का कहना है कि वे हर किसी को न्यायपूर्ण अवसर देना चाहते हैं।

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