4 साल के बच्चे पर लगा यौन शोषण का आरोप


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दक्षिणी दिल्ली: राजधानी में एक बच्ची के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया है, लेकिन हैरानी इस बात की है कि आरोप एक चार साल के बच्चे पर लगाया गया है। मामला द्वारका (दक्षिण) थाना इलाके का है, जहां पीड़ित बच्ची की मां की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। जिला पुलिस उपायुक्त शिबेष सिंह ने बताया कि पुलिस के पास शिकायत आने के बाद संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया।

मां का आरोप गुप्तांगों पर चोट के मिले निशान
पुलिस अधिकारियों ने बताया आरोपी बच्चा महज चार वर्ष का है, जिसके खिलाफ आरोप लगे हैं। घटना शुक्रवार की है, जबकि पुलिस को घटना की जानकारी शनिवार को मिली थी। सूचना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली और मामले की छानबीन शुरू कर दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बच्ची की मां ने घटना की शिकायत दी थी। पुलिस को मिली शिकायत में बच्ची की मां ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को बच्ची स्कूल गई हुई थी, लेकिन जब वह स्कूल से वापस घर आई, तो उसके गुप्तांगों पर चोट के निशान थे। बच्ची को दर्द होने पर जब मां ने उससे पूछा, तो बच्ची ने पूरी आपबीती सुनाई। मां के अनुसार, बच्ची ने बताया कि स्कूल में उसके ही सहपाठी ने उसके साथ गलत काम किया है।

स्कूल की तरफ से ढुलमुल रवैया देख पुलिस को दी शिकायत
बच्ची की मां का आरोप है कि उन्होंने स्कूल में इस घटना की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बच्ची के मेडिकल के बाद पुलिस ने पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और मामले की छानबीन की जा रही है। हालांकि अभी पुलिस ने इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की है, लेकिन जांच की जा रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी बच्चा भी उसी स्कूल में पीड़िता के साथ ही पढ़ता है। उन्होंने बताया कि मामले में पीड़ित और आरोपी दोनों न सिर्फ नाबालिग हैं, बल्कि मासूम हैं, जिसके कारण पुलिस पूरी घटना में कानूनविद् और चाइल्ड वेलफेयर समिति से सलाह मशविरा कर रही है। वहीं मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण पुलिस के आला अधिकारी पूरी घटना पर कुछ बोलने से बच रहे हैं।

बच्चे के मानसिक स्तर की होनी चाहिए जांच
इहबास में वरिष्ठ मनोचिकित्सक ओमप्रकाश ने घटना पर हैरानी जताते हुए कहा कि चार वर्षीय बच्चे का दिमाग दुष्कर्म या छेड़छाड़ करने के लिए विकसित नहीं हुआ होता है। हालांकि अगर पुलिस को मामले की सूचना मिली है, तो वह अलग मसला है, लेकिन चिकित्सकीय तौर पर बच्चे के दिमागी संतुलन की जांच की आवश्यकता है। यह पूरा मामला बेहद संवेदनशील है, तो वहीं पुलिस को भी दोनों पक्षों के लिए संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है।