कहीं मृत न हो जाए यमुना नदी!


नई दिल्ली: शेरपुर गांव के रहने वाले हुक्म सिंह अस्सी बरस के हैं। वह बताते हैं कि अब से 60-65 बरस पहले वह यमुना चंदगीराम अखाड़े के पास से यमुना में कूदते थे और तैरते हुए दूसरी तरफ पुराने गढ़ी मैंडू गांव तक निकल आते थे। यमुना में हमेशा पानी रहता था। यमुना के खादर में हमारे आज भी खेत हैं। उन दिनों खेत में काम करने के दौरान घर से पानी नहीं लेकर आते थे। खुरपी से एक फिट खोद दिया और थोड़ी देर बाद धरती से साफ पानी निकल आता था। आज यमुना वैसी नहीं रही। यहां तक की उसके खादर में उगी सब्जियों में भी जहर है। ऐसा कहना हुक्म सिंह का ही नहीं बल्कि दिल्ली के हर उस बुजुर्ग का है जिसने दिल्ली में शान से बहती यमुना को देखा है।

यदि आज यमुना की बात करें तो वजीराबाद से आगे यमुना की एक गंदे नाले जैसी नजर आती है। यमुना की सफाई को अब तक जितनी भी योजना बनी वह सफल नहीं हो पाई। यमुना की सफाई को लेकर अभी तक 1500 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन आज तक यमुना वैसी की वैसी ही है। दिल्ली से यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नाले यमुना को सबसे ज्यादा गंदगी देते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली में यमुना में सबसे ज्यादा गंदगी नजफगढ़ नाले से जाती है। जिसे हम नजफगढ़ नाला बोलते हैं वह साहिबी नदी है, जो अलवर की एक झील से निकलती है। समय के साथ वह नाला बन गई। 1974 में वाटर पॉल्यूशन कंट्रोल एक्ट बना था जिसके तहत नदी में अशोधित व अर्धशोधित सीवेज या औद्योगिक पानी डालना गैर-कानूनी है। लेकिन देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली में ही ऐसा होता है।

सुप्रीम कोर्ट एक आदेश के अनुसार यमुना में हथिनी कुंड से इटावा तक 10 क्यूमेक्स (घन मीटर प्रति सेकंड) जल लगातार बहना चाहिए लेकिन उसका ध्यान नहीं रखा जाता। आज दो दशक से यमुना को साफ किए जाने की कवायद चल रही है योजनाएं बन रही हैं लेकिन यमुना की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गौर करने वाली बात है कि जैसी स्थिति आज यमुना है वैसी ही स्थिति 1950 में लंदन की टेम्स नदी की थी लेकिन आज वह लंदन की सबसे स्वच्छ नदियों में से एक है। वहां प्रयास किए गए वह सफल हुए लेकिन यहां जो प्रयास किए जा रहे हैं वह काफी नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना में प्रदूषण रोकने के लिए सबसे पहले दिल्ली की आबादी का कचरा यमुना में सीधे गिराए जाने से रोकने के उपाय किए जाने चाहिए। इसके अलावा जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पुराने हो चुके हैं या काम नहीं कर रहे हैं उन्हेें दोबारा बनाया जाना चाहिए। सभी एजेंसियों को साथ मिलकर काम करना होगा तभी यमुना साफ हो पाएगी। नहीं तो आने वाले समय में यमुना पूरी तरह मृत नदी हो जाएगी।

– आदित्य भारद्वाज