दिल्ली में मानसून से पहले जलभराव से MCD को चुनौती


नई दिल्ली : दिल्ली में सफाई को लेकर नालों का बडा मुद्दा होता है। हर साल दिल्ली की सड़के दरिया बन जाती है। और फिर शुरू होता है पार्टीयों का एक दूसरे पर आरोप लगाना क्या दिल्ली फिर मानसून से डूबेगी या फिर सालों से सबक लेते हुए कुछ उपाय किये जायेगे। पिछले दो सालों में तीनों निगमों में से पूर्वी दिल्ली नगर निगम ज्यादा चर्चा में रहा है। कभी फंड की मारमारी तो कभी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल इसी के चलते हुऐ।

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पूर्वी दिल्ली के मेयर बिपिन बिहारी सिंह खुद एमसीडी अधिकारियों के साथ नाले कि सफाई के काम का निरीक्षण किया उनसे पूछने पर बताया कि सुबह 7 बजे से नालों की डिसिल्टिंग का स्टेटस जानने निकले हुए हैं। करीब 9 नालों की सफाई का काम बिपिन बिहारी सिंह देख चुके थे। उन्होंने बताया कि इस बार पीडब्लूडी अधिकारी नालों की सफाई में एमसीडी का हाथ बंटा रहे हैं। दोनों विभागों में तालमेल पहले से बेहतर है और इस बार बारिश में जलभराव की समस्या से ज्यादा बेहतर तरीके से निपटा जाएगा।

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नार्थ दिल्ली एमसीडी मेयर प्रीती अग्रवाल ने उत्तरी दिल्ली में पीडब्लूडी के नालों का दौरा किया। इस दौरान नालों में जमा गाद और कूड़े को देखने के बाद मेयर ने बताया कि यदि जल्द ही इन नालों से गाद नही हटाई गई तो बारिश के दौरान दिल्ली का उत्तरी इलाके में जलभराव की स्थिति बन सकती है। दरसअल, मेयर प्रीति अग्रवाल और नॉर्थ एमसीडी कमिश्नर पीके गुप्ता ने मानसून की तैयारियों को देखने के लिए उत्तरी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ब्रिटानिया चौक, लौरेंस रोड, वज़ीरपुर, आजादपुर, जहांगीरपुरी में एमसीडी और पीडब्लूडी के नालों को भी देखा। मेयर ने बताया कि लॉरेंस रोड के पास रिंग रोड से सटे नाले से गाद नहीं निकाली गई है।मेयर ने बताया कि यदि वक़्त रहते पीडब्लूडी इन नालों से गाद नहीं निकालती तो इन नालों के पास बनी कॉलोनियों और सड़कों पर बारिश के दौरान जलभराव होने की आशंका है।