कौशल शिक्षा से उन्नत बनेगा देश: रूडी


नई दिल्ली: जो रोजमर्रा का आपका जीवन सुंदर बनाता है, सरल बनाता है वह कोई डिग्री वाला या पीएचडी व्यक्ति नहीं होता वह एक सामान्य व्यक्ति होता है। उदाहरण के तौर पर आपका ड्राइवर, गुलदस्ते बनाने वाला, फोटोग्राफर सभी को पास एक विशेष कौशल होता है। हमारे देश में शिक्षा को लेकर जो प्रयास हुए उसमें कौशल को नहीं जोड़ा गया नतीजतन कौशल वाले लोगों की पहचान नहीं बन पाई। हमारी सरकार का यही प्रयास है कि देश के युवाओं के कौशल का विकास होना चाहिए। इसी दिशा में हमारी सरकार काम कर रही है। ये बातें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने विज्ञान भवन में ‘स्किल इंडिया मिशन’ की द्वितीय वर्षगांठ के मौके पर कही।

उन्होंने कहा कि मेरा मंत्रालय ऐसा मंत्रालय है जो हर मंत्रालय से जुड़ा हुआ है। फिर चाहे जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय हो, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय हो, ग्रामीण विकास मंत्रालय हो या फिर वस्त्र मंत्रालय सभी से हम समझौते करते रहते हैं। पहले क्या होता था जो बच्चा आठवीं या दसवीं तक पढ़ाई करता था उसे कहा जाता था कि उसे आईटीआई करवा दो। उसे बिल्कुल पीछे का व्यक्ति माना जाता था, लेकिन हमारी सरकार ने कौशल विकास पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा युवा शक्ति की बात करते हैं। हमने युवाओं को मौका दिया। इसके तहत जो बच्चा आठवीं तक पढ़ाई करने के बाद दो साल तक आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त करता है हमने निर्णय किया कि उसे दसवीं की मान्यता दी जाए ताकि वह आगे अपनी पढ़ाई जारी रख सके।

इस तरह दसवीं के बाद दो सालों तक आईटीआई करने वालों का 12वीं मान्यता दी जाए ताकि वह आगे पढ़ाई जारी रख सके। नेशनल एप्रेंटिस स्कीम के तहत अभी ढाई लाख युवा हर साल विभिन्न कंपनियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। हमारी योजना है संख्या को बढ़ाकर 50 लाख किया जाए। कार्यक्रम में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री उमा भारती, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी समेत उद्योग जगत से जुड़े लोग, सरकारी अधिकारी व गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।