निर्मल जल का गंदा धंधा


पश्चिमी दिल्ली: दिल्ली में पीने के स्वच्छ जल की बड़ी समस्या है। पिछले दिनों लोगों में अपने स्वास्थ्य और सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ी तो पीने के स्वच्छ जल की मांग में भी बेहिसाब बढ़ोत्तरी हुई। शहर के अंदर रहने वाला एक पूरा वर्ग आज बाजार से पानी खरीदकर पीता है, जिसे वह मानता है कि बाजार से मिलने वाला पानी शुद्व और स्वच्छ ही होगा। पानी बेचने वाली कई कंपनियां भी इस पानी को गंगा वाटर होने का दावा करती हैं। लेकिन अब निर्मल जल के इस धंधे पर पानी माफिया का कब्जा हो चुका है। पानी माफिया पुलिस की मिलीभगत से हर रोज अवैध रूप से लाखों लीटर पानी निकाल कर बेच रहा है। इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ जब दिल्ली सरकार के एक दबंग अधिकारी ने पानी माफिया के एक अवैध प्लांट पर छापेमारी की।

मयूर विहार एसडीएम अजय अरोड़ा को बीते दिनों सूचना मिली थी कि गाजीपुर इलाके में बड़े पैमाने पर भू जल दोहन किया जा रहा है। इस इलाके से पानी माफिया प्रति दिन लाखों लीटर पानी निकाल कर बेच रहा है। मुखबिर ने एसडीएम को यह भी बताया कि पानी निकालने वाले लोग बेहद शातिर हैं और उन्होंने बोरवैल बिलकुल थाने के पीछे लगा रखे हैं। मुखबिर ने इस पूरे मामले में गाजीपुर पुलिस की मिलीभगत की भी सूचना अधिकारी को दी थी। सूचना के बाद एसडीएम ने गाजीपुर के घड़ौली गांव की खाली पड़ी जमीन पर छापा मारा। छापा मारने गई टीम ने देखा कि थाने के पीछे की एक सड़क पर कई ट्रक, टैंम्पो और ट्रैक्टर खड़े थे। इनमें से कुछ में प्लास्टिक के लंबे-लंबे पाइपों से पानी भरा जा रहा था। टीम ने इन पाइपों का पीछा किया तो कई पाइप अंडर ग्राउंड थे और कुछ छिपा कर निकाले गए थे। टीम पाइपों का पीछा करते हुए सैकड़ों मीटर दूर जाकर एक टूटे फूटे अधबने मकान में पहुंच गई।

यहमकान के अंदर पानी का पूरा प्लांट लगा हुआ था। यहां पर 4 बड़े-बड़े बोरवैल जमीन के अंदर सैकड़ों फिट गहरे लगे हुए थे। जिनके जरिए जमीन के अंदर से पानी निकाला जा रहा था। इन बोरवैलों के सहारे दर्जनों पानी के टैंकरों को भरकर डिमांड के अनुसार सप्लाई किया जाता था। एसडीएम अजय अरोड़ा के मुताबिक उन्होंने यहां से 7 ट्रक, एक ट्रैक्टर और 5 टैंकर जब्त किए हैं। टीम को जांच के दौरान पता चला है कि एक टैंकर में करीब 12 हजार लीटर पानी आता है और इस अवैध प्लांट से प्रतिदिन करीब 50 ट्रक पानी निकाला जाता था। पानी की सप्लाई बड़े-बड़े होटलों, रेस्टोरेंट और ढाबों में की जाती थी। इसके अलावा टीम को यहां एक बड़ा वाटर प्योरिफाई करने का प्लांट भी मिला है। जिसके जरिए जमीन के पानी को प्योरीफाइ कर बड़े-बड़े जारों में भरकर आस-पास के इलाकों में पानी सप्लाई करने वाले दुकानदारों तक पहुंचा दिया जाता था। बताया जाता है कि इस मामले में दो लोगों की तलाश की जा रही है।

कैसे किया जाता है स्वच्छ जल का काला धंधा: दिल्ली सरकार के एक अधिकारी की मानें तो आजकल ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर पानी बेचे जाने के धंधे में मोटी कमाई है। जहां ब्रांडेड कंपनी की 10 लीटर पानी की एक बोतल 30 से 40 रुपए में आती है, वहीं लोकल पानी से भरी बोतल को मात्र 15 से 20 रुपए में बेच दिया जाता है। इसके अलावा पानी के अवैध कारोबार में लगे लोग ब्रांडेड कंपनियों की बोतल में लोकल प्योरीफाइ किया गया पानी भी भरकर बेचते हैं, जिसमें मोटा मुनाफा होता है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए अवैध प्लांटों से भरकर प्योरीफाई पानी को किसी गोदाम तक लाया जाता है और वहां से बोतलों में भरकर पानी सप्लाई करने वालों तक पहुंचाया जाता है। यानी फ्री में अवैध तरीके से निकाले गए जमीन के पानी को माफिया लाखों रुपए में बेच देता है।

गांव की खाली पड़ी जमीन पर लगा दिए गए हैं बोरवैल: पानी माफिया ने गांव की खाली पड़ी जमीन पर घास और झाडिय़ों के बीच बनवा दिए थे बोरवैल। बोरवैल कब बनाए गए और किसने बनवाए थे, पुलिस के लिए यह अभी जांच का विषय है। लेकिन सूत्रों का यह भी कहना है कि जिसकी जमीन पर बोरवैल लगाए गए थे, अगर उनकी भूमिका पता चली तो उन पर भी कार्रवाई किया जाना तय है।

टैंकरों पर फर्जी तरीके से लिखे गए थे ऑयल कंपनियों के नाम: पुलिस और अन्य एजेंसियों को गुमराह करने के लिए माफिया ने टैंकरों पर कई ऑयल कंपनियों के नाम फर्जी तरीके से लिख दिए थे। पानी निकालने का पता न चल पाए, इसलिए जिन पाइपों से टैंकरों में पानी भरा जाता था, उन्हें जमीन के नीचे अंडरग्राउंड तरीके से बोरवैल तक पहुंचाया गया था। धंधे में लगे लोग पुलिस की मिलीभगत के कारण बेखौफ होकर अपना काम कर रहे थे।

पुलिस को छापेमारी की नहीं दी गई थी खबर: एसडीएम को इस बात की जानकारी थी कि अगर छापेमारी में पुलिस को सूचना दी गई तो, पूरी रेड बेकार हो सकती है। माफिया उनकी टीम के पहुंचने से पहले ही मौका ए वारदात से गायब हो जाएगा। एसडीएम ने इस मामले में पहले अवैध प्लांट पर रेड मारी और प्लांट में घुसने के बाद गाजीपुर पुलिस को मौके पर बुलाया। अधिकारियों ने यहां से बरामद सामान के सीजर मेमो भी अपने सामने ही भरवाए थे।

– कुमार गजेन्द्र