कारोबार में सुगमता का प्रयास


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नई दिल्ली: सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी व जी.एस.टी. के जरिये विश्व के व्यापार जगत में उथल-पुथल लाने को तत्पर मोदी सरकार की निगाहें अब विश्व बैंक पर टिकी हैं। इसमें दोराय नहीं कि पाकिस्तान व चीन से जूझ रही नमो की सरकार व फौज आतंकवाद की जड़ों को भी मिटाने की कोशिश में की जा रही है कि विश्व के 353 में से कुछ देशों में स्थापित कारोबारियों की मार्फत निवेश पर भी गणित बैठाया जा रहा है, विश्व के राजनीतिक नभ पर जो धाक मोदी जमाने का दाव खेल रहे हैं, उसके सामने विपक्ष सकते में है। जी.एस.टी. पर भी विपक्ष को फिलहाल मात मिली है। चर्चा गर्म है कि विश्व के राजनीतिक पटल पर भारतीय छवि को लगातार चमक दिला रहे नमो ने विश्व बैंक से कारोबार में सुगमता के प्रयास भी तेज करा दिए हैं।

बताया जाता है कि पी.एम. मोदी की सलाह पर केन्द्र सरकार ने विश्व बैंक से कारोबार की सुगमता से जुड़ी रैंकिंग सुधारने की जोरदार पैरवी की है। मंत्रालय के सूत्रों का मानना है कि जिस तरह से कारोबार करने की स्थितियों में सुधार हुआ है। उससे इस बार भारत दुनिया के टॉप 25 देशों में शामिल हो सकता है। प्रख्यात कारोबारी सुखबीर शरण अग्रवाल का कहना है कि नमों ने देश की छवि में निखार किया है। विश्व बैंक की 2017 की रैंकिंग में 190 देशों में भारत का स्थान 185वां था। अब अगले साल 2018 में भारत की गिनती टॉप 25 देशों में हो जाएगी। विश्व बैंक 2018 की रैकिंग नवम्बर में जारी करेगा। दिल्ली व मुम्बई की कारोबार करने की स्थितियों के आधार पर भारत की रैंकिंग की जाती है।

कारोबारी चमन लाल मारवाह का कहना है कि रैंकिंग के आधार पर ही मल्टीनैशनल कम्पनियां देश-विदेश में निवेश की रणनीति बनाती हैं। बीते एक साल में प्रक्रियागत सुधारों में निर्माण कार्य का परमिट खर्च 13.60 लाख से घटकर 1.91 लाख हो गया है। 213 दिन की जगह अब सारी स्वीकृतियां मिलने का औसत समय 60 दिन हो गया है। साथ ही निर्माण कार्य का परमिट 30 दिन में मिलने लगा है। कारोबारी देवराज बावेजा का मानना है कि बीते एक साल में उठाए गए कदमों से दिल्ली तथा मुम्बई में कारोबार करना सरल हो गया है। खासतौर पर विश्व बैंक के चारों पैरामीटरों प्रक्रिया, समय, गुणवत्ता व खर्च शामिल हैं।

गत बुधवार को इसके मद्देनज़र केन्द्रीय शहरी विकास सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा व औद्योगिक नीति विभाग के सचिव रमेश अभिषेक ने विश्व बैंक की टीम से दिल्ली में मुलाकात की थी। इस मौके पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के कमिश्रर पुनीत गोयल ने विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी दिया बताया जाता है। समझा जाता है कि बीते एक साल में कारोबारियों में हर्ष जताया गया है। पता चला है कि जुलाई माह में मुम्बई के अधिकारियों की भी ऐसी बैठक होगी। कारोबारी इलैक्ट्रॉनिक्स रमेश बजाज का कहना है कि मोदी सरकार के आने के बाद दिल्ली की तरह ही मुम्बई में भी काम करने की स्थितियों में सकारात्मक सुधार हुआ है। दोनों महानगरों में विश्व बैंक के चारों पैरामीटर बेहतर बताए गए हैं।

(दिनेश शर्मा)