खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का कमाल, बजट में गोलमाल


पश्चिमी दिल्ली: दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले खाद्य एंव आपूर्ति विभाग का गोलमाल सामने आया है। विभाग सरकार से हर साल करोड़ों रुपए का बजट ले तो लेता है, लेकिन विभाग के पास इस बात का कोई हिसाब-किताब नहीं है कि यह बजट उसने खर्च किया की नहीं। सरकार की ओर से जारी किया गया यह बजट विभाग के कार्यालय और इमारतों के नवीनीकरण के लिए होता है। 2017 में अभी तक ढाई करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। इस बात का खुलासा एक आरटीआई के द्वारा हुआ है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को कार्यालयों की इमारतों के नवीकरण और खरीद के लिए हर साल करोड़ों रुपये जारी किए जाते है, लेकिन विभाग ने नवीकरण और खरीद में एक भी रुपया खर्च नहीं किया। यह खुलासा एक आरटीआई के माध्यम से हुआ है।

आरटीआई में मिले जवाब के मुताबिक विभाग के लिए 2015-16 में ढाई करोड़ रुपये जारी किए गए थे, जिसमें से एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया। बड़ा सवाल यह भी है कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को नवीकरण और इमारतों की खरीद के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये को प्रयोग में क्यों नहीं लाया जा रहा है ? हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि हर साल बजट की राशि को कम करने की बजाय सरकार बढ़ाती रहती है। या यूं कहें कि इस बजट को बढ़ा कर दिखाया जाता है। विभाग में चल रहे इस गोलमाल को सामने लाने के लिए आरटीआई एक्टिवस्ट जीशान हैदर ने एक आरटीआई लगाकर जवाब मांगा था कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के समस्त सर्कल के रखरखाव के लिए वर्ष 2015 से लेकर 30 जून 2017 तक कितनी राशि आवंटित की गई और इसमें से कितनी राशि खर्च की गई? आरटीआई के विभाग की ओर से बताया गया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के समस्त सर्कल के रखरखाव के लिए कोई भी राशि आंवटित नहीं की गई है।

लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के समस्त कार्यालयों के लिए इमारतों के नवीनीकरण व निर्माण और खरीद के लिए वर्ष 2016-17 में तीन करोड़ रुपये और वर्ष 2017 से जून 2017 तक ढाई करोड़ रुपये बजट के रुप में दिए गए है। 2016-17 में वर्ष 2015 के मुताबिक 50 लाख रुपये की ज्यादा राशि बजट में बढ़कर आई है। सवाल यह भी है कि अगर बजट की राशि को खर्च ही नहीं किया गया है, तो फिर नया बजट राशि जारी ही क्यों किया जा रही है? विभाग के इस बजट का का क्या किया जाता है कि इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। ज्ञात हो सरकार का यह विभाग भी कमाऊ विभागों में आता है। अगर बात करें पिछले रिकार्ड की तो कांग्रेस का शासन हो या बीजेपी का, इस विभाग पर कई बार सवाल खड़े हुए हैं। लेकिन इस बार जिस तरह का गोलमाल सामने आया है, उसका जवाब विभाग से देते नहीं बन रहा है।

– कुमार गजेन्द्र