गोल मार्केट की जगह बनेगा गोल म्यूजियम…


नई दिल्ली: अंग्रेजों के जमाने की धरोहर गोल मार्केट के स्थान पर अब म्यूजियम बनने जा रहा है। इस म्यूजियम में इतिहास संबंधी चीजें रखी जाएंगी, इनमें विशेषकर लुटियन जोन का इतिहास दिल्ली की जनता को बताया जाएगा। म्यूजियम को बनाने के लिए एनडीएमसी जल्द ही इसके लिए टेेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। इस म्यूजियम में ब्रिटिश समय से लेकर नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के आस्तित्व में आने तक की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं, सामग्रियों और अन्य चीजों को जल्द से जल्द एकत्र किया जाएगा और इन सभी विरासती और ऐतिहासिक महत्व की तथ्य परक सामग्री को संग्रहालय की सांस्कृतिक आत्मा के रूप में दिल्ली की जनता, आगन्तुकों और पर्यटकों तथा भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जा सकेगा। इस संग्रहालय में स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद की सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक आयामों और दशाओं को दर्शाने वाले चित्रों कलाकृतियों, फोटोग्राफस और अन्य सामग्रियों के साथ-साथ उन स्वतंत्रता सेनानियों के चरित्र का चित्रण भी होगा, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति भी दी थी।

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष नरेश कुमार ने बताया कि इस ऐतिहासिक और विरासती महत्व की नई दिल्ली स्थित गोल मार्केट का पुनर्रुद्धार करके इसमें नई दिल्ली की झांकी दर्शाता एक भव्य संग्रहालय सितंबर 2018 तक स्थापित कर दिया जाएगा। परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि यह संग्रहालय यहां जनता को खुली बहस और विचार-विमर्श के लिए एक अवसर प्रदान करेगा। यह संग्रहालय अध्यापकों, वयस्कों, युवाओं और महिला संगठनों को विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से सरकारी कार्यक्रमों और गतिविधियों के प्रोत्साहन में सहायता प्रदान करेगा और उन सबके बीच हमारी विरासती महत्व की समझ तथा राष्ट्रीय विकास और तत्वों पर उनके विचार-विनिमय का केंद्र भी बनेगा।

इस विरासती महत्व की ईमारत के पुनर्रुद्धार की रूपरेखा की जानकारी देते हुए पालिका परिषद अध्यक्ष ने कहा कि इस इमारत के संरक्षण का उद्देश्य केवल यह नहीं है कि इस इमारत की वर्तमान स्थिति को स्थिर किया जाएगा अपितु इसकों आधुनिक सुविधाओं की संवेदनशीलता के साथ आधुनिक प्रयोगों के लिए अंगीकृत किया जाए। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक भवन का वास्तुकारी पुनर्विकास तो होगा ही साथ ही यहां एक सेंट्रल फूड कोर्ट बनेगा और जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए इनमें शौचालयों को आधुनिक रूप में विकसित किया जायेगा, पीने के पानी की सुविधा, सूचना पटों, संकेत पटों, बेंच, फव्वारें इत्यादि भी इसके परिसर में होंगे। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक परिसर का उन्नतिकरण इनके पुर्नप्रयोग की दृष्टि को ध्यान में रखते हुए, प्रबंधन के आधुनिक साधनों तथा इसके हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ही सावधानीपूर्वक और कौशलपूर्वक तरीके से किया जायेगा।