सरकार फौरन बुलवाये संसद का शीतकालीन सत्र : कांग्रेस


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नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र को अभी तक आहूत नहीं करने को लेकर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने आज सरकार से कहा कि सत्र को फौरन बुलाना चाहिए ताकि नोटबंदी, जीएसटी, जम्मू कश्मीर की स्थिति, डोकलाम और पाकिस्तान नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सके और सरकार से जवाब मांगा जा सके। पार्टी ने यह भी आशंका जतायी कि संसद सत्र नहीं बुलाने के पीछे कहीं यह बात तो नहीं है कि सरकार कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र प्राय: नवंबर के तीसरे सप्ताह में बुलाया जाता है, किन्तु दुर्भाज्ञपूर्ण है कि इसे अभी तक नहीं बुलाया गया है। साथ ही सत्र से 15 दिन पहले सभी सदस्यों को इस बारे में सूचित किया जाता है।

किन्तु इस बार सरकार ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा, हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि आप संसद का शीतकालीन सत्र कब बुला रहे हैं? हम सरकार से यह भी पूछना चाहते हैं कि क्या संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई है और अगर हुई है तो बैठक में किन तारीखों की सिफारिश की गई है? और अगर उसकी बैठक नहीं हुई है तो आज तक यह बैठक क्यों नहीं बुलाई गई है।तिवारी ने कहा कि वह सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या वह संसद का सामना करने से डर रही हैद, ? नोटबंदी के फैसले के एक साल बाद इसके प्रभाव, जीएसटी के क्रियान्वयन, डोकलाम, पाकिस्तान नीति आदि ऐसे मुद्दे हैं जिन पर संसद पर चर्चा होनी चाहिए और सरकार से जवाब मांगा जाए।

 कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, इस सरकार (भाजपा नीत संप्रग सरकार) का संस्थानों के प्रति पूर्णत: असम्मान भरा रवैया रहा है..चाहे वो भारतीय रिजर्व बैंक हो या सीएजी या विभिन्न जांच एजेंसियां। उन्होंने संसद का सत्र तुरंत आहूत करने की मांग करते हुए कहा, किसी राज्य के विधानसभा चुनाव सरकार के लिए संसद का सामना करने से बचने का बहाना नहीं बनना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार संसद के सत्र को छोटा करने का प्रयास कर रही है, तिवारी ने कहा, जहा05 तक सत्र छोटा करने की बात है, ये एक बहुत ही बुनियादी विषय है जिसके रूपर भारत की राजनीतिक पार्टियों और जो सरोकार वाले नागरिक हैं, उनको चिंता करने की जरुरत है। क्योंकि अमूमन ये पाया गया है कि पिछले कुछ वषो’ मे, कुछ दशकों में भिन्न-भिन्न प्रदेशों में, विधानसभाएं बहुत ही कम समय के लिए मिलती हैं। पर भारत के लोकतंत्र के लिए जो एक राहत वाली बात थी, वो ये थी कि जो संसद की कार्यवाही है, चाहे संसद के सत्र के माध्यम से, चाहे संसदीय स्थायी समिति के माध्यम से, चाहे सलाहकार समित के माध्यम से, वो बहुत ही सुचारु रुप से चलती थी। (यदि) उसमें कटौती की जा रही है तो ये भारत के लोकतंत्र के रूपर सीधा-सीधा प्रहार है।