भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा संस्कृत शिक्षक केंद्र का शुभारंभ


पश्चिमी दिल्ली: दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा संस्कृत शिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया गया। यह केंद्र वर्ष 2016 में आईएएस परीक्षा में संस्कृत विषय लेकर परीक्षा देने वाले प्रतिभागियों के लिये है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केशव चन्द्रा ने शिरकत की। इस अवसर पर दिल्ली सरकार के पूर्व प्रधान सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा अधिकारी सेवाराम शर्मा ने कहा कि संस्कत भारतीय जनमानस की भाषा है। इस विषय से भारतीय प्रबन्धन सेवा में अधिक से अधिक लोग पहुचें। यह हमारा ध्येय होना चाहिये। संस्कृत के विद्यार्थियों का अब प्रशासनिक सेवा की परीक्षाओं में अधिक रुचि हो रही है, जिसके सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने कहा कि संस्कृत के प्रशिक्षार्थियों के लिये किसी भी परीक्षा में भाग लेने के लिये दिल्ली संस्कृत अकादमी हर स्तर पर प्रयासरत है।

इस क्रम में अकादमी द्वारा आज प्रशासनिक सेवा परीक्षा संस्कृत शिक्षण केंद्र के अध्ययन की व्यवस्था की है । यह प्रशिक्षण केन्द्र अक्टूबर तक चलेगी। इसमें परीक्षा सम्बन्धी सभी विषय सामग्री विशेषज्ञों के द्वारा उपलब्ध करायी जायेगी। इस अध्ययन केन्द्र में 70 परिक्षार्थी लाभ ले सकेंगे। डॉ. भट्ट ने कहा कि इन कक्षाओं में उच्च कोटि के शिक्षकों के द्वारा प्रतिभागियों को परीक्षा की तैयार कराई जायेगी। इस वर्ष शिक्षार्थियों की संख्या से यह लगता है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जाने के लिये संस्कृत के छात्र मेहनत कर रहे हैं। शिक्षा या प्रशासन के क्षेत्र में संस्कृत के छात्र जितने अधिक पहुचेंगे, उतना ही समाज का विकास होगा होगा। पिछले वर्ष अकादमी द्वारा चलाये गये प्रशिक्षण केन्द्र से 12 छात्रों ने प्रशासनिक सेवा परीक्षा में सफ लता पाई। केशव चन्द्रा ने कहा कि संस्कृत भाषा के उत्थान एवं प्रचार प्रसार के लिये दिल्ली सरकार की ओर से अनेक प्रयास किये जा रहे हैं।

संस्कृत विश्व की प्राचीन भाषा है। संस्कृृत भाषा को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिये इसे सरल एवं रोजगारपरक बनाने की ओर प्रयास करना चाहिये। मैने भी प्रशासनिक सेवा परीक्षा संस्कृत विषय से उत्तीर्ण की है। हमारे समय में बहुत कम लोग संस्कृत विषय लेते थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी राजीव यदुवंशी ने कहा कि मैने प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में यह ध्येय लेकर चला था कि संस्कृत विषय से ही प्रशासनिक सेवा की परीक्षा देकर सफ लता प्राप्त करूंगा। डॉ. राजेन्द्र कुमार ने कहा कि शिक्षण कार्य के लिये मेहनत अपनी जगह है। आज के युग में बहुप्रतिभा युक्त व्यक्तित्व भी बहुत आवश्यक है। किसी भी विषय में बिना समय व्यतीत किये तुरन्त सही प्रतिक्रिया देना विलक्षण बुद्धि का प्रतीक होता है।