जेएनयू को लेनी चाहिए जामिया से सीख


दक्षिणी दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार ताजा विवाद खुद वहां के कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने सेना के पुराने टैंक को कैंपस में रखने की वकालत की। कुलपति के बयान पर विरोध शुरू होने के बाद जब ‘पंजाब केसरी’ ने दक्षिणी दिल्ली में ही स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) में पड़ताल की तो वहां नजारा कुछ और ही देखने को मिला। दरअसल जामिया में नौ दिसम्बर, 2009 में वायुसेना की तरफ से एक पत्र आया था। पत्र के माध्यम से वहां पर वायुसेना ने मिग-23 को उपहार स्वरूप देने की इच्छा जताई थी। इसके बाद 14 जून, 2010 को एयरक्राफ्ट वहां रखवा दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि एयरक्राफ्ट लगने से पूर्व या आज तक कभी भी किसी छात्र या शिक्षक संगठन ने इसका विरोध नहीं किया। आज ये एयरक्राफ्ट जामिया के इंजीनियरिंग विभाग के लिए एक मिसाल बना हुआ है। छात्रों के लिए वायुसेना का एयरक्राफ्ट वायुसेना के शौर्य का प्रतीक बना हुआ है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जेएनयू छात्रसंघ या शिक्षक संघ सेना के टैंक पर नकारात्मक दृष्टिकोण क्यों अपना रहा है। देखने वाली बात यह है कि जेएनयू को भी दूसरे विश्वविद्यालयों की तरफ से अनुदान राशि मिलती है, लेकिन समय-समय पर वहां उठे विरोध के स्वर लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। ये वही विश्वविद्यालय है, जहां पर उमर खालिद और कन्हैया कुमार आदि छात्रों पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने पर कानूनी कार्रवाई की गई।

राहुल शर्मा/गणेश पाठक