एलपीजी की तरह ही रेलवे भी सब्सिडी छोड़ने का देगा विकल्प


नई दिल्ली: पीएम मोदी के घरेलू एलपीजी पर सब्सिडी छोडऩे की घोषणा के बाद निकले परिणाम से उत्साहित रेलवे भी अब कुछ इसी तरह की योजना शुरू करने जा रही है। रेलवे इस समय सालाना 34 हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी के नीचे दबा है। इससे उबरने के लिए रेलवे ‘गिव इट अप’ का विक्लप देश की जनता के सामने पेश करने जा रही है। इसके लिए रेलवे ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और उम्मीद की जा रही है कि अगले महीने से यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। इसके लिए रेलवे अपने फॉर्म में भी कॉलम बनाएगा और ऑनलाइन रेल टिकट खरीदने वालों के लिए वेबसाइट पर भी विकल्प का कॉलम होगा। रेल मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक रेलवे को यह आइडिया फरीदाबाद के अवतार कृष्ण खेर से मिला है। दरअसल, खेर ने आईआरसीटीसी की वेबसाइट के जरिए अपना रेल टिकट बुक कराया था। जब उन्होंने रेल टिकट का प्रिंट लिया तो उसमें नीचे लिखा हुआ था कि क्या आप जानते हैं कि आपके किराए का 43 फीसदी देश के आम नागरिक वहन करते हैं।

इसके बाद खेर ने अपनी यात्रा के दौरान मिली सब्सिडी के बदले में 950 रुपये का चेक बनाकर रेलवे को भेज दिया। इसी के बाद रेलवे में इस बात का मंथन शुरू हो गया। अधिकारी का कहना है कि लगातार मंथन के बाद रेलवे इस निर्णय पर पहुंचा है कि लोगों को सब्सिडी छोडऩे का विकल्प दे दिया जाएगा। इसके लिए आईआरसीटीसी से टिकट बुक करने पर सब्सिडी छोडऩे का विकल्प भी आएगा। रेलवे के अधिकारी ने साफ किया है कि सिर्फ सीनियर सिटीजन या फिर खास श्रेणी में मिलने वाली छूट ही नहीं बल्कि आम यात्री भी ये विकल्प दे सकेंगे। रेलवे का कहना है कि किरायों में बढ़ोतरी न करने की वजह से ही इस वक्त स्थिति यह है कि रेलवे का जितना खर्च होता है, उसके मुकाबले वह यात्री से सिर्फ 57 फीसदी किराया ही वसूलता है। एक तरह से 43 फीसदी सब्सिडी ही है।

रेलवे दावा करता रहा है कि किराए में बढ़ोतरी न होने की वजह से ही वह लगातार घाटे में जा रहा है। उसके यात्रियों में से सिर्फ थर्ड एसी के यात्रियों से ही उसे इतना किराया मिलता है, जो उसके खर्च से मामूली अधिक है। बाकी सभी श्रेणियों में यात्रा पर उसका जितना औसत खर्च होता है, उसके मुकाबले किराए के रूप में वह सिर्फ 57 फीसदी ही वसूलता है। रेलवे का कहना है कि सब्सिडी छोडऩे के इस विकल्प के लिए प्रक्रिया तैयार करने जा रहा है और उम्मीद है कि अगले महीने तक पूरा सिस्टम बन जाएगा। इसके बाद रेलवे यह देखेगा कि कितने यात्री सब्सिडी लौटाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।