साहित्य अधूरा रहेगा यदि वह राष्ट्र भाव नहीं जगाता: डॉ. कृष्ण गोपाल


दक्षिणी दिल्ली: किताब की दुनिया एक अद्भुत दुनिया है। किताबों की सुगंध होती है और किताब पढऩे का एक अलग ही आनंद होता है। यह बात मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के 60वीं वर्षगांठ के मौके पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में वीडियो संदेश के जारिए यह बात कही। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि कोई भी साहित्य अधूरा रहेगा यदि वह राष्ट्र भाव नहीं जगाता। भारत के साहित्य सृजन में वेदकाल से राष्ट्र और मानवीय संवेदना केंद्र में रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा वंदे मातरम बोलते हुए कई लोगों ने देश के लिए अपने प्राण तक त्याग दिए हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोवा की राज्यपाल और लेखिका मृदुला सिन्हा ने कहा कि वृक्ष की तरह ही पुस्तक भी किसी का पुत्र, मित्र और गुरु होता है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रियता को एक दबी हुई चिंगारी कहा जो समय आने पर प्रज्ज्वलित हो जाती है। अंत में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष बल्देव भाई शर्मा ने न्यास के 60 वर्ष पूरे होने पर न्यास के आगामी कार्यक्रमों के बारे में बताया। उन्होंने न्यास द्वारा राष्ट्रीय पंचायत पुस्तक मेला, राष्ट्रीय संस्कृत पुस्तक मेला और राष्ट्रीय बाल पुस्तक मेला लगाए जाने की बात कही।