एमसीडी पर भारी सरकारी स्कूल


नई दिल्ली: जहां पहले माता-पिता यह कहते नजर आते थे कि सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाना मतलब उनका जीवन खराब करना है, लेकिन इन दिनों यह धारणा उल्टी हो गई है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में व्यवस्था दिन-प्रतिदिन बेहतर होती जा रही है तो वहीं एमसीडी स्कूलों में आलम यह है कि बच्चे भीषण गर्मी में आज भी टीन वाली क्लासों में बैठने को मजबूर हैं। एमसीडी स्कूलों और राजकीय स्कूलों की स्थिति जानने के लिए करोल बाग के एमसीडी और सर्वोदय बाल विद्यालय स्कूलों का जायजा लिया गया। इस दौरान यह देखने को मिला कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाले स्कूलों में स्पोट्र्स से लेकर पढऩे तक की बेहतर व्यवस्था है तो वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले एमसीडी स्कूलों में आज भी वही हाल है जो कई वर्षों पहले हुआ करता था। इस पर राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव अजयवीर यादव का कहना है कि यदि स्कूल प्रशासन सजग हो तो प्रत्येक स्कूल में बच्चों को बेहतर सुविधा है।

शौचालय और क्लासों की दशा…

शिक्षा के नाम पर बड़े-बड़े वादे करने वाले नेताओं की जमीनी हकीकत स्कूलों में जाकर ही पता चलती है। एमसीडी और राजकीय स्कूलों में जाकर जब शौचालयों, पीने के पानी की व्यवस्था और क्लास रूम को देखा गया तो पता चला कि आज के समय पर इन दोनों स्कूलों में बेहद फर्क है। एमसीडी स्कूलों के शौचालयों की हालत ऐसी है कि शायद ही कोई इसका इस्तेमाल करे। बदबू और गंदगी देखकर ऐसा लगता है कि शायद इसकी सफाई भी ठीक समय पर नहीं होती है। साथ ही इन दोनों स्कूलों के क्लास रूम में भी बेहद फर्क है। जहां एक तरफ राजकीय स्कूलों के क्लास रूम अच्छे ढंग से सजाय गए हैं वहीं बात एमसीडी स्कूलों की करें तो इनके क्लास रूम की हालत बेहद खराब है। पंखे भी काफी पुराने हैं।

पानी की व्यवस्था में भी अंतर…
एमसीडी स्कूलों में जहां बच्चों के लिए पानी की टंकी तो है, लेकिन उसमें ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसे पानी फिल्टर होकर बच्चों को मिल सके। टैंक में चाहे कुछ भी गिरे बच्चों को मजबूरन वही पानी पीना पड़ता है। बच्चे जहां पानी पीते हैं वहीं मीड डे मील का ढेर लगा हुआ है। इसके नीचे ही कई तरह की सब्जियां और चावल जैसी चीजों का जमाव रहता है लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। वहीं राजकीय स्कूलों की बात करें तो इसकी पीने की व्यवस्था कुछ हद तक ठीक है। यहां बच्चों के लिए पानी की मशीने लगाई गई हैं, लेकिन अब यह भी बच्चों के लिए कितना शुद्ध है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

एक तरफ जिम तो एक तरफ मिट्टी…

जहां एक तरफ राजकीय स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को स्कूल में जिम की सुविधा दी जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ एमसीडी स्कूल के बच्चे मिट्टी और काई लगी घास में खेलते हुए नजर आते हैं। इसके अलावा राजकीय स्कूलों के बच्चों को कैरम बोर्ड और टेबल टेनिस खेलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है तो एमसीडी स्कूल के छात्रों के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं है। यहां तक की टीन की छत के नीचे बैठने वाले इन बच्चों के लिए पंखे भी इतने पुराने हैं कि शायद ही उन्हें इन पंखों के नीचे गर्मी से राहत मिलती होगी। इस आधार पर देखा जाए तो एमसीडी स्कूल राजकीय स्कूल से शिक्षा के मामले में बेहद पिछड़ी हुई है।

– सिमरनजीत सिंह