मैक्स अस्पताल पर लगा ओवर चार्जिंग का आरोप


max hospital

उत्तरी दिल्ली: निजी क्षेत्र के अस्पतालों पर अक्सर मरीजों के स्वास्थ से ज्यादा अस्पताल के स्वास्थ की चिंता की जाती है। अस्पताल के स्वास्थ को दुरुस्त रखने के लिए अक्सर उन पर गैर जरूरी ऑपरेशन करने और भारी भरकम बिल बनाने के आरोप लगते रहते हैं। ताजा मामला शालिमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल पर लगा है। हालांकि, अस्पताल ने इससे पूरी तरह से इंकार किया है। अस्पताल में दिल की बाईपास सर्जरी कराने आए 52 वर्षीय मरीज अशोक गोयल के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने पहले बाईपास सर्जरी के लिए दो लाख दो हजार का पैकेज बताया था। अशोक को बीते 31 मई को दाखिल किया गया था और सात जून को उनका बाईपास किया गया।

इसके बाद 19 जून को अस्पताल ने बताया कि उनका अभी तक का बिल पांच लाख इकसठ हजार का है, जिसमें बाईपास का पैकेज भी शामिल था। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें कुछ और परेशानी बता कर अस्पताल में ही रोक लिया। एक सप्ताह बाद 26 जून को जब परिवार वालों ने बिल मांगा तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। केवल एक सप्ताह में ही दवाओं का बिल बाईपास सर्जरी के बिल से भी ज्यादा हो गया था। अस्पताल के अनुसार, 26 जून को उनका पूरा बिल ग्यारह लाख सैंतीस हजार हो गया था। परिवार वालों का आरोप है कि इसमें गलत बिलिंग की गई है। नेफ्रो के डॉ. माथुर जो तीन दिन में एक बार विजिट पर आए थे उसके बाद दो बार विजिट चार्ज जोड़ा गया है।

साथ ही जिस डॉक्टर ने सर्जरी की उनके छुट्टी पर होने के बावजूद भी उनका विजिट दिखा कर उसके पैसे जोड़ दिए गए। इस पर अस्पातल का कहना है कि जब अशोक गोयल को दाखिल किया गया था तब उन्हें दिल की परेशानी के साथ ही किडनी की भी गंभीर परेशानी थी। किडनी की अवस्था ठीक नहीं होने की वजह से ही उनका बाईपास आठ दिन बाद हुआ था। लेकिन ऑपरेशन के बाद किडनी की हालत खराब होने लगी। जिसकी वजह से मरीज को अस्पताल में ही रोकना पड़ा। इस दौरान किडनी का भी इलाज हुआ। अस्पताल में जो भी प्रोसीजर हुए उसके पहले और पूरी जानकारी मरीज के परिजनों को देने के साथ ही उनकी लिखित मंजूरी भी ली गई है। यही नहीं मरीज के परिजनों को बिल के संबंध में भी लगातार जानकारी दी गई है। बाईपास के बाद मरीज को आईसीयू में ज्यादा दिन रखना पड़ा, इसकी वजह से उनका बिल ज्यादा बना। लेकिल इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा मरीज के परिजन आरोप लगा रहे हैं।