जामिया में अल्पसंख्यक दर्जे का मुद्दा सुलगा


दक्षिणी दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक दर्जे को केंद्र से वापस लेने के फैसले को लेकर विश्वविद्यालय में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जामिया शिक्षक संघ ने अल्पसंख्यक दर्जे को बरकरार रखने के लिए अदालत में लड़ाई लडऩे की तैयारी शुरू कर दी है। छात्र संगठनों ने अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इस पूरे मामले को लेकर जामिया शिक्षक संघ के सचिव महमूद आलम ने कहा कि जामिया का अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं छीना जाना चाहिए। इसके अलावा इस पूरे मामले को लेकर जामिया के छात्र नेता अंबर फातमी ने कहा है कि वह संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे को बरकरार रखने के लिए आंदोलन शुरू करेंगे।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि रंगनाथ मिश्रा और सच्चर कमेटी की सिफारिशों के अनुसार जामिया को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिलना चाहिए। इस पूरे मामले को लेकर जामिया के कुलपति प्रो. तलत अहमद ने कहा कि अभी तक इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को अभी तक केंद्र सरकार से कोई आधिकारिक रूप से सूचना नहीं मिली है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया को वर्ष 2011 में अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिला था। संस्थान में पाठ्यक्रम में कुल सीटों का तीस प्रतिशत मुस्लिम छात्रों के लिए निर्धारित किया गया था। इसके अलावा 10 फीसदी मुस्लिम महिला आवेदकों और अन्य 10 प्रतिशत मुस्लिम अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किया गया था।