संपर्क अधिकारी लापता, कैसे दिखाए जाएं फ्लैट


पश्चिमी दिल्ली: दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने हाल ही में हाउसिंग स्कीम 2017 में आवेदन करने वाले लोगों को फ्लैट दिखाने की सुविधा लाने का दावा किया था। साथ ही डीडीए ने यह भी कहा था कि आवेदक संबंधित अभियंता से संपर्क कर उनके साथ फ्लैट देख सकते हैं तथा फ्लैट की पूरी जानकारी ले सकते हैं लेकिन असलियत यह है कि डीडीए ने अभी तक किसी अधिकारी व अभियंता का नाम व फोन नंबर जारी नहीं किया है जो आवेदकों को फ्लैंट संबंधित पूरी जानकारी दे सके या फ्लैट देखने में सहायता कर सके। लोग डीडीए से इस बाबत सवाल कर रहे हैं, मगर डीडीए की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि डीडीए ने तीन चार दिन पहले आवेदन करने वाले लोगों को फ्लैट दिखाने का दावा किया था। डीडीए की ओर से कहा गया था कि इस हाउसिंग स्कीम में रुचि रखने वाले लोगों के लिए डीडीए एक विशेष सुविधा लाई गई है। इस सुविधा में जिस इलाके के फ्लैट के लिए लोग आवेदन करना चाहते हैं, उसे न सिर्फ अच्छी तरह से देख सकते हैं बल्कि संबंधित अभियंता से संपर्क कर पूरी जानकारी ले सकते हैं। डीडीए ने इस बाबत स्कीम में शामिल सभी 12 हजार फ्लैंटों की सूची अपनी वेबसाइट पर डाल दी है। डीडीए का कहना है कि इस सूची में एचआईजी फ्लैट से लेकर जनता फ्लैट तक की पूरी जानकारी है। साथ ही डीडीए ने अलग-अलग इलाके में स्थित फ्लैटों के अभियंताओं का फोन नंबर आदि भी वेबसाइट अपलोड किया है। लेकिन लोग जब वेबसाइट पर उपरोक्त सूची के साथ संबंधित अधिकारी व अभियंता का नाम व फोन नंबर ढूंढते हैं तो उसकी कोई जानकारी नहीं मिल रही है। इस कारण आवेदक शंका के घेरे में है कि डीडीए सच बोल रहा है या सिर्फ एक सब्जबाग।

गौरतलब है कि आवासीय योजना-2014 में डीडीए ने 25 हजार फ्लैटों का ड्रा निकाला था, उसमें सबसे ज्यादा संख्या जनता व एलआईजी फ्लैटों की थी लेकिन ड्रा के बाद लगभग 11 हजार आवंटियों ने फ्लैटों में सुविधाएं न होने तथा जगह कम होने की बात कह कर फ्लैट वापस कर दिए थे। इस बार ऐसी कोई बात न हो इसलिए डीडीए आवेदकों को पहले से ही पूरी तरह संतुष्ट करने में लगा है। डीडीए को उम्मीद है कि इस नई सुविधा से लोग पूरी तरह से संतुष्ट होंगे क्योंकि फ्लैटोंं में काफी बदलाव किया गया है। दूसरी ओर डीडीए के इन दावों के बावजूद अभी भी हाउसिंग स्कीम 2014 के आवंटी डीडीए पर सुविधाविहिन फ्लैट देने का आरोप लगा रहे हैं।

– जे.के. पुष्कर