कारगिल विजय दिवस पर याद किया जाएगा जवानों का शौर्य


नई दिल्ली: कारगिल में किसी बहादुरी से हमारे जवानों ने दुश्मन को धूल चटाई थी। कारगिल युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलता पूर्वक अंजाम देकर हमारे वीर जवानों ने भारत की भूमि पर कब्जा कर बैठे घुसपैठियों को खदेड़ दिया था। इस युद्ध में हमारे बहुत से जवान शहीद हुए। कितने ही घायल हुए। भारत के हर सिपाही ने अपनी उस सौंगध पूरी तरह निभाया जो हर सिपाही तिरंगे के सामने देश की अखंडता की रक्षा के लिए लेता है। कैसा था उस जवानों का अद्भुत शौर्य? कैसे विषम परिस्थितियों में जवानों ने युद्ध लड़ा? इन जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए 26 जुलाई को युद्ध में शामिल रहे जवान और सेना के कई अधिकारी इंडिया गेट पर जुटेंगे। जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है।

26 जुलाई को इंडिया गेट पर कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और कारगिल युद्ध के दौरान विभिन्न मोर्चों पर लडऩे वाले सिपाही शामिल होंगे। कुछ केंद्रीय मंत्री, सांसद भी भी शहीदों को श्रद्धांजलि के लिए इंडिया गेट पहुंचेंगे। इस दौरान युद्ध में शामिल रहे जवान और सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद लोगों को कारगिल में भारतीय सेना के अद्भुत शौर्य की कहानी अपनी जबानी बताएंगे।

26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की थी। इस वर्ष कारगिल विजय के 18 साल पूरे हो रहे हैं। जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के सचिव मनीष चौधरी का कहना है कि हर वर्ष जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है, लेकिन ऐसा पहली बार इंडिया गेट पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। हम इस दौरान कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले जवानों को ही नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए जवानों को भी श्रद्धांजलि देंगे। दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे जम्मू-कश्मीर के छात्र भी हमारे साथ शामिल होंगे। हमारा उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को हमारे जवानों की शौर्य गाथा बताना है ताकि वे उनसे प्रेरणा ले सकें।

– आदित्य भारद्वाज