प्रकाशन व्यवसाय भी पत्रकारिता की तरह जिम्मेदारीपूर्ण: किरण चोपड़ा


नई दिल्ली: जिस प्रकार एक पत्रकार निष्पक्ष व निर्भीक तरीके से अपने कार्य को करता है, उसी तरह प्रकाशक की भी यह जिम्मेदारी व नैतिक कत्र्तव्य बनता है कि वह अपने कार्यों को ऐसे ही सम्पूर्ण करे। प्रकाशक को पत्रकार की तरह निष्पक्ष और स्वच्छ भूमिका निभानी होती है। इन दोनों का रिश्ता भी समाज में अटूट है। यदि कोई लेखक अपने निजी स्वार्थ के लिए कुछ इस तरह का लेख लिखता है जिससे राष्ट्र की एकता-अखंडता पर प्रभाव पड़ता है तो इसके लिए वह तो जिम्मेदार होता ही है, साथ ही प्रकाशक भी उतना ही जिम्मेदार है। उक्त उद्गार वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की चेयरपर्सन व पंजाब केसरी दिल्ली की डायरैक्टर श्रीमती किरण चोपड़ा ने अपने सम्बोधन में व्यक्त किए। श्रीमती चोपड़ा नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के अदिति महाविद्यालय द्वारा छात्राओं के लिए पुस्तक प्रकाशन में व्यवसायोन्मुख सर्टिफिकेट पाठ्ïयक्रम के दौरान छात्राओं को सम्बोधित कर रही थीं।

एनबीटी व कालेज के संयुक्त प्रयासों से छात्राओं के लिए एक सप्ताह के सर्टिफिकेट कोर्स का आयोजन किया गया, जिसके समापन समारोह में श्रीमती चोपड़ा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पब्लिशियन इंडस्ट्री न केवल पत्रकारिता बल्कि साहित्य जगत और हिन्दी भाषा के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। श्रीमती चोपड़ा ने यह भी कहा कि शायद हमारा साहित्य महंगा होने के कारण आम लोगों तक नहीं पहुंच पाता, इसके लिए भी एनबीटी को ऐसे प्रयास करने चाहिएं ताकि वह अधिक से अधिक आम लोगों की पहुंच में आ सके। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी मजबूत राष्ट्र की नींव उस राष्ट्र के युवा व छात्र-छात्राएं होते हैं, जो अपनी शिक्षा व ज्ञान के माध्यम से राष्ट्र को तो नई दिशा देते हैं। उन्होंने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि आज देश को ऐसे प्रधानमंत्री मिले जो बेटियों की महत्ता को समझते हैं।

बेटियां शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कारों व संस्कृति को भी संजोये रखें। समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में एनबीटी के चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा भी मौजूद थे। छात्राओं का सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पुस्तकें न हों तो मनुष्यता नहीं होगी। पुस्तकों ने हमें आपस में जोड़ रखा है। आज हमने छात्राओं के लिए पहला प्रयोग किया जो पूरी तरह सफल रहा। भारत की बेटियां सारी दुनिया के लिए आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक प्रकाशन इस दौर के लिए बेहद जरूरी है। पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आने वाले समय में एनबीटी पुस्तक दान की योजना के बारे में भी सोच सकता है। साथ ही एनबीटी आईटी इंडस्ट्री व माइक्रोसाफ्ट के साथ मिलकर आने वाले समय में कई वर्कशापों का आयोजन करेगा, जिससे नई टैक्नालोजी के माध्यम से पुस्तक प्रकाशन में मदद मिल सकेगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के अदिति कालेज में ‘नेशनल बुक ट्रस्ट’ (इंडिया) के सौजन्य से सात दिन के एक पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया। पाठ्यक्रम 4 से प्रारंभ होकर 11 अगस्त तक चला। यह कोर्स राष्ट्रीय पुस्तक नाम के 60 वर्ष पूरे होने पर केवल महिलाओं के लिए आयोजित किया गया।  कालेज प्राचार्या डा. ममता शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए यह कोर्स किसी वरदान से कम नहीं है। इस प्रकार की गतिविधियों से जहां छात्राओं का मनोबल तो बढ़ता ही है, साथ ही रोजगार के भी नए-नए आयाम खुलते हैं। सात दिन तक चले इस कोर्स ने अपनी एक अन्य मिसाल कायम की। समाचार पत्र-पत्रिकाओं तथा अनेकों मीडिया संस्थानों से बड़ी-बड़ी हस्तियों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर छात्राओं को शिक्षित किया। छात्राएं किस प्रकार इस क्षेत्र में अपना कैरियर बना सकती हैं, सम्पादन, डिजाइनिंग, कवर पेज, कंटेन्ट से लेकर पत्रिकाओं के आकार, रंग तक सभी की विस्तृत जानकारियां दी गईं। साथ ही मार्केटिंग के गुर भी सिखाए गये। इस दौरान समारोह में प्रो. नीरजा नागपाल, आईटी प्रमुख बालिन्दु दाधिची सहित सम्बन्धित विषयों के कई विशेषज्ञ उपस्थित थे।

(भारत कपूर)