दिव्यांग सवारियों को महत्व दे रेलवे: हाईकोर्ट


high court

नई दिल्ली : दिव्यांग यात्रियों के साथ सबसे कीमती यात्रियों के रूप में रेलवे पेश आए। यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने उस दृष्टिहीन छात्र के मामले में की जो स्पेशल कोट का दरवाजा भीतर से बंद होने से इसमें चढ़ नहीं सका था। इसकी वजह से डीयू के एमफिल प्रवेश परीक्षा में भाग नहीं ले पाया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने कहा कि युवक तीन जुलाई को ट्रेन में दिल्ली पहुंचने की कोशिश की थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका क्योंकि उसे कंनफर्म सीट नहीं मिली।

जिससे वह पांच जुलाई को आयोजित प्रवेश परीक्षा में भाग नहीं ले सका। चार जुलाई को वह स्टेशन आया था जहां ट्रेन लेट थी। आखिरकार जब ट्रेन पहुंची तो दिव्यांगों के लिए आरक्षित कोच का दरवाजा भीतर से बंद था जिसके चलते वह इसमें चढ़ नहीं सका। यह ट्रेन है जो उसे परीक्षा देने से रोका। अदालत ने कहा कि आपको (रेलवे) को और अधिक काम करने की जरूरत है। रेलवे ने दावा किया कि एक लाख लगेज कोच में से करीब 32 सौ को दिव्यांग कोच के रूप में तब्दील किया है।