सीट कटौती मुद्दा : सभी की नजरें जेएनयू अकादमिक परिषद की बैठक पर


Jawaharlal Nehru University

नयी दिल्ली :  जेएनयू में सीटों में कटौती के विवाद पर चर्चा पर केंद्रित कल होने वाली जेएनयू अकादमिक परिषद की बैठक में पुरऊषोतमा बिलिमाले जैसे प्रोफेसरों के सपने दांव पर लगे हैं। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन स्टडीज में एक मोटे पैकेज पर काम कर रहे कन्नड़ प्रोफेसर बिलिमाले ने जेएनयू से जुडऩे के लिए अक्तूबर 2015 में कन्नड़ चेयर का नेतृत्व करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। बिलिमाले ने कहा, ”जब से मैंने कन्नड़ चेयर का नेतृत्व किया तब से अब तक कर्नाटक से 12 हजार किताबों के साथ पुस्तकालय बनाया, विवरण पुस्तिका और पाठ्यक्रम तैयार किया।” बिलिमाले ने शोधार्थियों की संख्या अधिकतम आठ या नौ पहुंचने तक हर साल तीन शोधार्थियों को लेने की योजना बनाई थी।जेएनयू की 21 मार्च को आई विवरण पुस्तिका में कन्नड़ को एक भी सीट आवंटित नहीं की गई। इससे स्तब्ध होकर बिलिमाले ने परेशान होकर कुलपति को पत्र लिखा।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 जुलाई तक जेएनयू द्वारा सीटों में कटौती को लागू किए जाने पर रोक के आदेश दिए हैं। इसके बाद छात्र और प्रोफेसर उम्मीद कर रहे हैं कि कल होने वाली अकादमिक परिषद की बैठक में अदालत के आदेश की अवज्ञा नहीं की जाएगी। बिलिमाले ने कहा, ”अकादमिक परिषद की यह बैठक महत्वपूर्ण होगी। अगर सीटों में कटौती को लागू किया जाता है तो मेरे पास यहां खाली बैठकर और वेतन का लाभ उठाने के अलावा और कोई काम नहीं होगा।’ जेएनयू छात्र संघ ने यूजीसी और जेएनयू द्वारा सीट कटौती का समर्थन किए जाने के विरोध में कल कैम्पस में एक रैली का आयोजन किया है।

(भाषा)