उच्चतम न्यायालय ने रावण दहन प्रथा समाप्त करने संबंधी याचिका खारिज की


नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने विजयादशमी त्योहार पर रावण दहण की प्रथा को समाप्त करने संबंधी याचिका आज खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह केहर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आनंद प्रकाश शर्मा की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मान्यताओं के अनुरूप वह सब कुछ करने का अधिकार है, जो उसे अच्छा लगता है।

न्यायमूर्ति केहर ने कहा, यह अदालत अच्छे और बुरे के निर्धारण के लिए नहीं है। यह कानूनी और गैर-कानूनी मामलों के निर्धारण के लिए है। आपको अपनी मान्यताओं के अनुरूप जो कुछ अच्छा लगता है, वह सब कीजिए और दूसरों को भी अपनी मान्यताओं के अनुरूप करने दीजिए।याचिकाकर्ता ने विजयादशमी के त्योहार पर रावण के पुतले के दहन की प्रथा को समाप्त करने का अनुरोध न्यायालय से किया था।

मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से पूछा, क्या आपने अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के बारे में सुना है? इससे पहले याचिकाकर्ता ने दलील दी कि रावण दहन की प्रथा का जिक्र न तो वाल्मीकि रामायण में है न ही तुलसीकृत रामायण में। इसके अलावा यह प्रथा पर्यावरण और स्वास्थ्य की से भी हानिकारक है। लेकिन पीठ ने उनकी दलील ठुकराते हुए याचिका खारिज कर दी।