‘पहाड़ से पलायन रोकना और रोजगार सृजन मुख्य उद्देश्य’


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पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन से उत्तराखंड में गांव के गांव खाली पड़े हैं। कुछ गांव तो ऐसे हैं, जहां केवल बुजुर्ग लोग ही रह गए हैं। उत्तराखंड के गांवों से पलायन रोकने, पहाड़ में रोजगार सृजन करने, शिक्षा व परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए उत्तराखंड सरकार की क्या योजनाएं हैं। एक जुलाई से लागू हो चुके जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) जैसे तमाम विषयों पर उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से पंजाब केसरी के प्रमुख संवाददाता आदित्य भारद्वाज ने विशेष बातचीत की, प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश:

हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब तब सरकारी स्कूलों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी सरकार अपने लिए गाड़ी, फर्नीचर व अन्य सामान नहीं खरीद सकती। इस पर आपका क्या कहना है ?

कोर्ट को इसका अधिकार ही नहीं हैं। कोर्ट को यह अधिकार ही नहीं है कि हमारे कमरों में एसी लगेगा कि नहीं लगेगा। हम गाड़ी खरीद सकते हैं या नहीं खरीद सकते। आखिर राज्य का एक बजट होता है। राज्य के 70 विभाग हैं। हमें 70 विभागों को देखना है। इसलिए जहां तक स्कूलों की बात है तो विधायक नीधि से, कई एनजीओ के माध्यम से स्कूली छात्रों के लिए व्यवस्था करते हैं एक साथ इतना धन निकाल पाना उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए बड़ा मुश्किल है। हां न्यायालय की जो भावना है वह हमारी भी है लेकिन न्यायालय को इस तरह के निर्णय का अधिकार उसके क्षेत्र से बाहर है। राज्य सरकार को स्कूली बच्चों की चिंता है। हम न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ अपील में जाएंगे। अभी इस संबंध में उत्तराखंड हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई होगी। यदि जरूरत पड़ी तो हम सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे।

उत्तराखंड में सड़क और राजमार्ग सुधारने की बात होती है। आज जबकि हवाई मार्ग से यात्रा करना बहुत महंगा नहीं है तो क्या परिवहन के लिए हवाई मार्ग उत्तराखंड में एक विकल्प हो सकता है?

देखिए हमारे राज्य में 70 हेलीपैड हैं। इसके अलावा, पिथौरागढ़, चिन्याली सोढ़, गोचर, पंतनगर और देहरादून सहित पांच हमारे हवाई पट्टियां हैं। गोचर, पिथौरागढ़ और चिन्याली सौर इनका हम आधुनिकरण कर रहे हैं। गोचर और पिथौरागढ़ में जो हवाई पट्टी है उनमें थोड़ी दिक्कत है। इन पट्टियों को बढ़ाया नहीं जा सकता लेकिन गोचर की हवाई पट्टी के पास एक पहाड़ है। हम उस पहाड़ पर हवाई पट्टी विकसित करेंगे। पंतनगर हवाई पट्टी का हम विस्तार कर रहे हैं। वहां 500 एकड़ लैंड हम एक्वायर करेंगे ताकि वहां बड़े जहाज उतर सकें। इसी तरह भविष्य की योजना है चौखटिया अलमोड़ा डिस्ट्रिक में हवाई पट्टी के रूप में विकसित करेंगे। इस बारे में प्रारंभिक बात हुई हैं। हम राज्य में हेलीपेड का लगातार विस्तार कर रहे हैं। जो 70 हैलीपेड हैं वह चिह्नित हेलीपेड हैं। इसके अलावा और भी जगह हैं जहां हेलीकॉप्टर उतारा जा सकता है। अभी जरूरत के हिसाब से हम उनका विस्तार करेंगे। हम कोशिश करेंगे कि डबल इंजन हेलीकॉप्टर का प्रयोग वहां पर हो। हम नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहेंगे कि क्षेत्रीय स्तर पर हेलीकॉप्टर का प्रयोग बढ़ाया जाए।

पहाड़ से लगातार पलायन हो रहा है। गांव के गांव खाली पड़े हैं। आपकी सरकार ने पहाड़ से होते पलायन को रोकने के लिए कोई योजना बनाई है क्या ?

देखिए पहाड़ से पलायन हो रहा है यह सही बात है। पलायन दो तरह का होता है एक विकास के लिए और दूसरा मजबूरी में जो किया जाता है। अब विकास के लिए जो पलायन हो रहा है उसे तो रोका नहीं जा सकता लेकिन मजबूरी में कोई व्यक्ति पलायन न करे इसके लिए पहली बार हमने उत्तराखंड में रोजगार सृजन एवं कौशल विकास मंत्रालय बनाया है। पहाड़ के लोगों के लिए औद्योगिक इकाइयां लगे इसके लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। यह हमारा लक्ष्य भी है कि पहाड़ के लोगों को वहीं पर रोजगार मुहैया कराया जाए, ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े। इसके अलावा पलायन रोकने के लिए एक आयोग भी बनाने जा रहे हैं। इस आयोग में विशेषज्ञ होंगे, जो पूरे शोध के बाद सरकार को बताएंगे कि पहाड़ से लगातार हो रहे पलायन के मुख्य कारण क्या हैं। आयोग की सिफारिशों के अनुसार पहाड़ पर पलायन रोकने के लिए काम किया जाएगा। हमने पहाड़ के छोटे किसानों के लिए बेहत न्यूनतम दरों पर कृषि ऋण की व्यवस्था की है। किसानों के लिए दूर दराज के गांवों लिए छोटी-छोटी कॉपरेटिव सोसाइटी बनाकर उन्हें रोजगार देने की भी योजना है।

आगामी कुछ विकास योजनाओं के बारे में बताएं जो उत्तराखंड सरकार लागू करने जा रही हो?

अलग-अलग निर्णय हैं जो हमने लिए हैं। 11 वर्षों से लंबित देवबंद-रुड़की रेल लाइन परियोजना को पूरा करने के लिए केंद्र से समझौता हुआ है। जल्द ही लाइन को पूरा कर लिया जाएगा। इस लाइन के बनने से रुड़की से मुजफ्फनगर की दूरी 42 किमी कम हो जाएगी। इससे देहरादून पहुंचने में दो घंटे का समय कम लगेगा इससे पर्यटन में बढ़ोतरी होगी। इसी तरह हमने पानी की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए हमने आम आदमी के योगदान के लिए जल संचयन योजना चलाई है। जिसमें हमने लोगों को जल संचित करने के लिए कहा है। वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट भी कई जिलों में लगाए जा रहे हैं। ताकि बारिश का पानी बेकार न जाए। हम राज्य में 200 करोड़ रुपए बड़े-बड़े जलाशय बना रहे हैं। इससे पर्यटन भी बढ़ेगा। सिंचाई भी होगी। पानी पीने के काम भी आएगा। पर्यावरण भी बेहतर होगा। पर्यटन के क्षेत्र में हम 13 नए पर्यटन स्थल विकसित करेंगे। ये किसी ने किसी थीम पर आधारित होंगे। जैसे पर्यावरण, योगा, अध्यात्म आदि।

उत्तराखंड के गांवों में उपचार की सुविधा को लेकर बहुत दिक्कत है। पर्वतीय क्षेत्रों में न तो बड़े अस्पताल हैं और न ही वहां डॉक्टर जाना चाहते हैं। इसको लेकर आपकी क्या योजना है ?

स्वास्थ्य को लेकर हमारी सरकार बहुत गंभीर हैं। राज्य बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि हमारी सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में दूर दराज के जिलों में 93 डॉक्टरों की नियुक्ति की है। इस वर्ष के अंत में हम 250 डॉक्टरों की और पहाड़ के गांवों में नियुक्ति करेंगे। हमारे पास सरकारी डॉक्टर्स की कुल 2700 पोस्ट हैं। हमारे पास अभी 1100 डॉक्टर हैं 1600 डॉक्टरों की कमी है। हम राज्य में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए दूसरे राज्य जैसे ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु से भी डॉक्टरों की नियुक्तियां अपने यहां करेंगे। उत्तराखंड में सबसे एमबीबीएस की पढ़ाई सबसे सस्ती है। मात्र 15 हजार रुपए वर्षभर की फीस हैं उत्तराखंड मेडिकल कॉलेजों में। इसके अलावा जो डॉक्टर पहाड़ पर जाता है उसे 55 प्रतिशत वेतन ज्यादा मिलता है। ओडिशा में अभी डॉक्टरों को पांचवां वेतन आयोग ही दिया जा रहा है। देश में सबसे ज्यादा तनख्वाह डॉक्टरों को उत्तराखंड में ही मिलती है। हम डॉक्टरों को सुविधाएं पूरी देते हैं। इसके बाद भी डॉक्टरों की दिक्कत है तो हमने यह निर्णय लिया है कि हम दूसरे राज्यों से डॉक्टर लेकर आएंगे। पहाड़ पर स्वास्थ्य सेवाओं की दिक्कत है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। पहाड़ के दूर दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें इसके लिए हमारी सरकार ने इस तरह का निर्णय लिया है। मुझे लगता है कि जब हम डॉक्टरों को बाकी राज्यों से ज्यादा वेतन और बेहतर सुविधाएं मुहैया कराएंगे तो डॉक्टर यहां आकर ज्वाइन करेंगे।