यमुना को क्यों नहीं बना सकते ‘थेम्स’ : मनोज तिवारी


नई दिल्ली : यमुना को लेकर दिल्ली का हर शख्स संजीदा है। सांसद मनोज तिवारी भी यमुना को लेकर अपना दर्द बता चुके हैं। रविवार को मनोज तिवारी लंदन में थे। जहां उन्होंने थेम्स नदी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने थेम्स नदी और यमुना की आपस में तुलना की। लंदन से ‘पंजाब केसरी’ से विशेष बातचीत में उन्होंने थेम्स नदी के बारे में बताया।

उन्होंने बताया कि थेम्स नदी को यहां की सरकार ने बिल्कुल साफ कर दिया है। इसी नदी पर प्रसिद्ध टॉवर ब्रिज है, जिसे लंदन ब्रिज भी कहते हैं। थेम्स नदी के बारे में बताया कि इस नदी के पानी को बढिय़ा तरीके से 250 से 300 मीटर के दायरे में सिमटाया गया है और इसके किनारे घर भी बने हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से इस नदी को साफ-स्वच्छ और पर्यावरण सहायक बनाया गया है उसी तरह हम यमुना को भी ऐसा बना सकते हैं।

बातचीत में तिवारी ने कहा कि थेम्स नदी में पानी का एक स्तर बना रहे इसके लिए लंदन सरकार ने पूरे इंतजाम किए हैं। उन्होंने कहा कि थेम्स पर बना लंदन टॉवर बड़े जहाजों के आने पर खुल जाता है, ठीक उसी तरह यमुना को भी बनाया जा सकता है। तिवारी ने भारत की एकजुटता के बारे में कहा कि लंदन में लोग एक-दूसरे के पास से निकल जाते हैं और बुलाते तक नहीं है लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। भारत में सभी लोग एक-दूसरे का हाल-चाल पूछते हैं और उनके अच्छे तरीके से मिलते भी हैं।

दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, भोजपुरी गायक व सांसद मनोज तिवारी रविवार को लंदन में आयोजित इंटरनेशनल भोजपुरी फिल्म अवार्डस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। मनोज तिवारी को भोजपुरी का ‘स्टार ऑफ द मिलेनियम’ अवार्ड से नवाजा गया है। गौरतलब है कि लंदन का थेम्स नदी भी कभी यमुना की तरह ही बहुत मैली थी। वर्ष 1858 में हालात यहां तक पहुंच गए थे कि इससे निकलने वाली बदबू की वजह से संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी थी।

थेेम्स को एक तरह से मृत नदी घोषित कर दिया गया था। इसके बाद सरकार ने सीवेज ढांचे में भारी निवेश किया और प्रदूषण से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए। अकेले थेम्स ही नहीं दुनिया की कई नदियां ऐसे ही साफ की गईं हैं। जैसे जर्मनी में राइन, दक्षिण कोरिया में हान और अमरीका में मिलवॉकी।

इन नदियों की सफाई के पीछे अहम बात थी, राजनीतिक इच्छाशक्ति और कड़े कानून। यहां यह बता दें कि यमुना को साफ करने के लिए इससे दिल्ली हो या फिर केंद्र की सरकारों ने जो प्रयास किए व नाकाफी थे। नदी बचाओ और पर्यावरण बचाने वाली कई संस्थाएं यमुना को साफ करने का बीड़ा उठा चुकी हैं लेकिन उनकी बातें राजनीतिक पटल पर आकर खत्म हो रही हैं।

– सतेन्द्र त्रिपाठी