नई दिल्ली: आम्रपाली ग्रुप मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिटर रिपोर्ट दाखिल करेंगे। तीनों निदेशकों को रात को हिरासत से छोड़ दिया गया है, क्योंकि दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा के दफ्तर सील हो गए हैं। कोर्ट ने दो बजे फोरेंसिक ऑडिटर को बुलाया है कि सारे कागजात कब तक इकट्ठा कर रिपोर्ट देंगे। कोर्ट ने कहा कि खरीददारों की सही बात है कि सभी दस्तावेज तरीके से रखे गए हों ताकि आसानी से फोरेंसिक ऑडिट हो सके। कोर्ट इस मामले में दोपहर दो बजे फिर से सुनवाई करेगा। वहीं आम्रपाली की ओर से बताया गया कि कोर्ट के आदेश के तहत 9 संपत्ति सील हो गई हैं. कोर्ट ने कहा कि इसकी पुष्टि भी होनी चाहिए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सहारा मामले में कोर्ट के कहने के बाद सहारा ने 30 ट्रक कागजात सेबी को भेज दिए थे। सेबी को इन्हें समझने में 6 महीने लग गए थे। आम्रपाली मामले में कोर्ट को इस मुद्दे को ध्यान रखना चाहिए। इस मामले में भी 46 हजार खरीददार हैं और ऐसे में इस तरह की घटना हो सकती है। इसलिए कोर्ट को फिलहाल पुलिस हिरासत को बने रहने देना चाहिए जब तक कि फोरेंसिक ऑडिटर सारे कागजातों से संतुष्ट ना हो जाएं. आम्रपाली से जुड़े अधूरे प्रोजेक्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट को तय करना था कि सीएमडी व दोनों निदेशकों की पुलिस हिरासत बढ़ई जाए या नहीं.

बुधवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वो आम्रपाली के तीन डायरेक्टर को पुलिस लॉकअप में न रखकर पुलिस स्टेशन में रखें। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा के अलावा बिहार की 9 जगहों को सील करने के आदेश दिए और कहा कि फोरेंसिक ऑडिटर्स के अलावा कोई भीतर नहीं जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों आम्रपाली के डायरेक्टर को सुप्रीम कोर्ट में तलब किया।