चुनाव आयोग में आप विधायकों के खिलाफ लाभ के पद के मामले में शिकायतकर्ता प्रशांत पटेल ने प्रतिवादी पक्ष पर सुनवाई को टालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है जिससे आप विधायक अपना कार्यकाल पूरा कर सकें।

आयोग में मामले की सुनवाई के दौरान पटेल की ओर से अधिवक्ता मीत मल्होत्रा ने लिखित जवाब में कहा कि प्रतिवादी आप के 20 विधायकों ने लाभ के पद के आरोप को साबित करने के लिये दिल्ली सरकार और विधानसभा के अधिकारियों को जिरह के लिये बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र मकसद सुनवाई को टालना है जिससे आरोपी विधायक अपने शेष बचे कार्यकाल को पूरा कर सकें।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर चुनाव आयोग द्वारा इस मामले में आप विधायकों का पक्ष सुनने के लिये गत 16 मई को फिर से सुनवाई शुरू की गयी है। सुनवाई के दौरान आप विधायकों ने आयोग से उनके खिलाफ लाभ के पद पर आसीन होने का आरोप सिद्ध करने के लिये पेश किये गये दस्तावेजों को पेश करने वाले दिल्ली सरकार और विधानसभा के अधिकारियों को जिरह हेतु तलब करने की मांग की है।

आप विधायकों की इस अर्जी पर अपने जवाब में पटेल की ओर से दलील दी गयी कि प्रतिवादी पक्ष की यह मांग न सिर्फ न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत के प्रतिकूल है बल्कि सुनवाई को विलंबित करने की एक तरकीब मात्र है। जिससे विधायक के पद पर गैरकानूनी रूप से बैठे ये लोग अपना कार्यकाल पूरा कर सकें।

उन्होंने अपने जवाब में कहा कि आयोग द्वारा इस मामले में आप विधायकों को उनका पक्ष रखने के लिये पहले ही पर्याप्त अवसर दिये गये हैं। प्रतिवादी पक्षकार आयोग के पिछले आदेश का लाभ उठा रहे हैं जिसमें आयोग ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख मुकर्रर करने से पहले विधायकों को उनका पक्ष रखने का मौका दिया था। उन्होंने कहा कि सुनवाई की तारीख तय किये जाने से बचने के लिये आप विधायकों ने अपना पक्ष रखते हुये सरकार और विधानसभा के अधिकारियों को जिरह के लिये बुलाने की अर्जी पेश कर सुनवाई टालने की कोशिश की है।

आप विधायकों के इस आशय के मद्देनजर पटेल ने आयोग से सुनवाई को अनावश्यक तरीके से विलंबित होने से बचाने और उपयुक्त समयसीमा में पूरा करने के लिये प्रतिवादी पक्षकारों की अर्जी को ठुकराते हुये सुनवाई की अगली तारीख तय करने का अनुरोध किया।

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