वर्तमान चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए गांधी दर्शन जरुरी है : महेश शर्मा


पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री महेश शर्मा का कहना है कि गांधी दर्शन वर्तमान चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए आज भी प्रासंगिक है और इसे युवा पीढ़ी तक पहुंचाए जाने की जरूरत है। महेश ने नमक सत्याग्रह पर यहां भारत में ‘हिस्टोरिकल बैकग्राउंड टू द इम्पोजिशन ऑफ साल्ट टैक्स अंडर द ब्रिटिश रूल इन इंडिया (1757-1947) और महात्मा गांधीज साल्ट सत्याग्रह (1930-31) अगेंस्ट द ब्रिटिश रूल’ पुस्तक का विमोचन करते हुए ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गांधी जी के अहिंसा दर्शन की वर्तमान परिस्थियों में भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को जरूरत है।

महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह प्रतीकात्मक रूप में शुरू किया था, जो सही मायनों में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत थी। इस अवसर पर संस्कृति सचिव रश्मि वर्मा और अतिरिक्त सचिव सुजाता प्रसाद, गांधी स्मृति एवं न्यास समिति के अध्यक्ष दीपंकर श्री ज्ञान और उच्चस्तरीय दांडी स्मारक समिति के उपाध्यक्ष सुदर्शन आयंगर उपस्थित थे। संस्कृति मंत्री ने पुस्तक के लेखक डॉ़ वाई पी आनन्द की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए समान रूप से उपयोगी साबित होगी और इससे युवा पीढ़ी को नमक सत्याग्रह के पीछे के कारणों और आजादी के आंदोलन के बारे में जानने का मौका मिलेगा।

संस्कृति सचिव सुश्री वर्मा ने कहा कि नमक सत्याग्रह ब्रिटिश साम्राज्य के लिए चुनौती था और गांधी जी के नमक पर कर हटाने के अथक प्रयासों से ब्रिटिश सरकार को मजबूर होकर इसे समाप्त करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपने इतिहास की ज्यादा से ज्यादा जानकारी देकर प्रेरित किया जा सकता है। उच्चस्तरीय दांडी स्मारक समिति के उपाध्यक्ष श्री आयंगर ने बताया कि केंद्र सरकार ने दांडी में एक स्मारक बनाने के लिए इस समिति का गठन किया है और इस स्मारक का डिजाइन तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि साबरमती से दांडी तक दांडी पथ का निर्माण किया गया है और दांडी मार्च के दौरान सत्याग्रही जिन स्थानों पर रुके थे, वहां ‘नाइट हाल्ट्स’ बनाये गए हैं, जहां दांडी की यात्रा करने वाले विश्राम कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से दांडी यात्रा पथ को प्लास्टिक से मुक्त करने की मांग करते हुए कहा कि इससे सरकार के स्वच्छता के संदेश का प्रसार भी होगा। उन्होंने कहा कि नमक सत्याग्रह को जानने से पहले नमक की कहानी को समझने की जरूरत है, जिस पर डॉ. आनन्द ने अपने अथक प्रयास से पुस्तक का लेखन किया है।